ईरान
पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच ईरान में मरने वालों की संख्या 1,500 से अधिक हो गई है। यह जानकारी सरकारी मीडिया ने स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से दी है।अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी से शुरू किए गए हमलों के बाद हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी तेहरान में रमजान खत्म होने के दौरान भीषण हवाई हमले हुए, जिससे लोगों में डर और अफरा-तफरी फैल गई।
युद्ध के चौथे सप्ताह में भी संघर्ष जारी है और अब इसका दायरा और बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। यह हमला करीब 4,000 किलोमीटर दूर से किया गया, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान के पास लंबी दूरी की ताकतवर मिसाइलें मौजूद हैं। इसके साथ ही ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने नतांज परमाणु संवर्धन केंद्र पर फिर से हमला किया गया है, जिससे परमाणु सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ गई है।
इस युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन हमलों में ईरान को कुल कितना नुकसान हुआ है और देश की कमान किसके हाथ में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुजतबा खामेनेई को इस भूमिका के लिए नामित किया गया है, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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