उड़ान डेस्क। आमतौर पर जब दुनिया में युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बावजूद सोने की कीमतें दबाव में हैं। इसकी वजह यह है कि युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका बढ़ गई है। यही कारण है कि सोना इस सप्ताह छह हफ्तों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा है।
शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड लगभग स्थिर रहकर 3,970.35 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा। यह 1 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। पूरे सप्ताह में सोने की कीमत 3 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुकी है। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.5 प्रतिशत फिसलकर 3,973.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए।
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी के आखिर में अमेरिका समर्थित ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सोने की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि युद्ध के कारण बढ़ी महंगाई केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखने के लिए मजबूर कर सकती है।तेल की तेजी ने बदल दिया बाजार का रुख
अमेरिका ने ईरान में पुलों और एक हवाई अड्डे पर हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत इस सप्ताह 14 प्रतिशत से अधिक चढ़ गई।
तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है। यदि महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व समेत दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकते हैं। इसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।
ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए क्यों होती हैं नुकसानदेह?
सोना ऐसा निवेश है, जिस पर ब्याज नहीं मिलता। ऐसे में जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या बढ़ने की संभावना मजबूत होती है, तो निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए सरकारी बॉन्ड और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं। इससे सोने की मांग कमजोर पड़ती है।
फॉरेक्स डॉट कॉम के बाजार विश्लेषक फवाद रज़ाकज़ादा का कहना है कि हालिया गिरावट के दौरान कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की है। उनका मानना है कि यदि तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो महंगाई और ब्याज दरों की उम्मीद भी बढ़ेगी, जिससे सोने पर दबाव बना रह सकता है।
मजबूत डॉलर ने भी बढ़ाया दबाव
इस सप्ताह अमेरिकी डॉलर लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ। डॉलर मजबूत होने से दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग प्रभावित होती है।
एवरबैंक के वर्ल्ड मार्केट्स प्रमुख क्रिस गैफनी का कहना है कि सोने में हालिया बिकवाली के पीछे दो बड़ी वजहें हैं, मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता। इन दोनों कारणों से वैश्विक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है।
अब फेड की अगली चाल पर नजर
हालिया आर्थिक आंकड़ों से अगली एफओएमसी बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना कुछ कम हुई है। इसके बावजूद बाजार मान रहा है कि तेल की कीमतों में तेजी फेड को आगे सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, सितंबर में अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना 53.3 प्रतिशत है। वहीं, फेड के उपाध्यक्ष फिलिप जेफरसन ने भी संकेत दिया है कि यदि महंगाई में जल्द सुधार नहीं होता, तो ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
लंबी अवधि में सोना फिर बन सकता है पसंद
हालांकि फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव है, लेकिन गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के साथ निजी निवेशकों की ओर से सोने में निवेश बढ़ सकता है। अभी निजी निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है, इसलिए आने वाले समय में इसमें विविधीकरण के लिए निवेश बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

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