July 21, 2026

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भारत का सेमीकंडक्टर पर बड़ा दांव : 21 अरब डॉलर से ज्यादा की सब्सिडी से क्या बदलेगी चिप इंडस्ट्री की तस्वीर?

सरकार ने सेमीकंडक्टर पर 21 अरब डॉलर से ज्यादा की सब्सिडी का दांव खेला है। इसमें पिछले हफ्ते घोषित 1,27,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना भी शामिल है। इससे उम्मीद है कि भारत साल 2032 तक सेमीकंडक्टर की वैश्विक दौड़ में शीर्ष 5 देशों में शामिल होने के अपने महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य के और करीब पहुंच जाएगा।

सरकार का अनुमान है कि इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की पिछले साल की विस्तृत योजना के अनुसार पांच साल के दौरान देश में 4 से 6 सेमीकंडक्टर फैब, 10 ओएसएटी (आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेम्बली ऐंड टेस्ट) इकाइयां तथा 6 से 10 कंपाउंड सेमीकंडक्टर संयंत्र लगाए जाएंगे। उम्मीद है कि टाटा का फैब संयंत्र साल 2028 के मध्य तक वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर देगा। हालांकि ओएसएटी एटीएमपी (असेम्बली, टेस्टिंग, मार्किंग ऐंड पैकेजिंग) क्षेत्र में नौ मंजूरियों में से तीन संयंत्र-माइक्रोन, केन्स और सीजी पावर पहले से ही चालू हैं।

अगर केंद्र सरकार की आर्थिक मदद, जिसमें सेमीकंडक्टर के लिए हाल ही में शुरू की गई योजना भी शामिल है, को वैश्विक नजरिये से देखें, तो यह साफ है कि सरकार ने बड़ा दांव लगाया है। विकसित देश इस क्षेत्र में बहुत आगे हैं।

यह प्रस्ताव आकर्षक रहा है। इसके तहत निजी क्षेत्र में संयंत्र के निवेश का 50 प्रतिशत सरकार बतौर वित्तीय सहायता दे रही है। इसके अलावा 20 और प्रतिशत की वित्तीय सहायता राज्य सरकार देती है। लेकिन अब फैब के लिए केंद्र सरकार के प्रोत्साहन को घटाकर 35 से 40 प्रतिशत तथा एटीएमपी/ओएसएटी संयंत्रों में 25 से 35 प्रतिशत कर दिया गया है।

लेकिन एक बड़ा सवाल यह है कि क्या कटौती करने के बाद भी यह प्रोत्साहन योजना निजी क्षेत्र और अधिक फैब तथा आपूर्तिकर्ताओं का तंत्र बनाने के लिए आकर्षक होगी। उदाहरण के लिए अमेरिकी सरकार ‘यूएस चिप्स एक्ट’ के तहत 52 अरब डॉलर का प्रोत्साहन पैकेज देती है। लेकिन कुल निवेश, जिसमें सरकारी सहायता और निजी क्षेत्र का निवेश शामिल है, टीएसएमसी, माइक्रोन, इंटेल और सैमसंग जैसी कंपनियों का संयुक्त रूप से 650 अरब डॉलर होने का अनुमान है। कई देशों में फैले हुए यूरोपीय संघ में सब्सिडी सहायता 47 अरब डॉलर है, जो भारत से दोगुनी से अधिक है। हालांकि एशिया में सब्सिडी के लिहाज से भारत की कुल प्रतिबद्धता दक्षिण कोरिया के लगभग बराबर है।

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