June 20, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

समंदर में बढ़ेगी भारत की ताकत : इंडियन नेवी में शामिल होंगे तीन शक्तिशाली स्वदेशी युद्धपोत

भारतीय नौसेना को तीन स्वदेशी युद्धपोत की सौगात मिलने वाली है. रविवार 21 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में बने तीन नेवल प्लेटफ़ॉर्म को सेवा में शामिल करेंगे. यह केवल दूसरी बार है जब नौसेना एक साथ तीन शक्तिशाली पोतों को सेवा में शामिल करेगी. इनमें विध्वंसक, एंटी सबमरीन युद्धपोत और समुद्र से जुड़ी खुफिया जानकारी जुटाने वाले पोत शामिल हैं. ये तीनों स्वदेशी जहाज 30 मार्च को नौसेना को सौंपे गए थे. अब 21 जून का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन ही में तीन वॉरशिप को नेवी में शामिल करेंगे. कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट में आयोजित एक खास समारोह में इन तीनों वॉरशिप को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा. इनमें एक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, दूसरा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रय और तीसरा सर्वे वेसेल लार्ज संशोधक है.

INS दूनागिरी की खासियत

इस शामिल किए जाने वाले बेड़े में सबसे अहम INS दूनागिरी है. यह ‘प्रोजेक्ट 17A’ का पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट और भारत में बने सबसे आधुनिक युद्धपोतों में से एक है. ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और मीडियम-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम से लैस यह फ्रिगेट नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक युद्ध क्षमताओं को बढ़ाएगा. दूनागिरी, पूर्ववर्ती आईएनएस दूनागिरी का आधुनिक स्वरूप है, जो लींडर क्लास का फ्रिगेट था और 5 मई 1977 से 10 अक्टूबर 2010 तक नौसेना का हिस्सा रहा. यह 16 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा गया पी17ए क्लास का पांचवां वॉरशिप है. पहले चार जहाजों के निर्माण से मिले अनुभव के आधार पर इसका निर्माण केवल 80 महीने किया गया है. ब्लू-वॉटर ऑपरेशन्स के लिए डिजाइन किया गया ‘दूनागिरी’ एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन मिशन को अंजाम दे सकता है. इस युद्धपोत में एडवांस्ड सेंसर, इंटीग्रेटेड सर्विलांस सिस्टम और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर क्षमताएं हैं. यह अकेले या नौसेना की बड़ी टास्क फोर्स के हिस्से के तौर पर काम कर सकता है. इंडियन नेवी को आने वाले महीनों में ऐसे दो और जहाज मिलने की उम्मीद है. भारतीय नौसेना ने इस श्रेणी के कुल सात जहाजों का अनुबंध किया था.

एंटी-सबमरीन वॉरफ़ेयर में माहिर है INS अग्रय

नौसेना में शामिल होने जा रहे INS अग्रय को एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है. दुश्मन की सबमरीन से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना शुरू की थी जिसके तहत अग्रय को बनाया गया है. साल 2019 में 16 वॉरशिप के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया गया था, जिनमें आठ कोचिन शिपयार्ड और आठ जीआरएसई में बनाए जा रहे हैं. इसी परियोजना के तहत निर्मित अग्रय अब नौसेना में शामिल किया जा रहा है. इससे पहले आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त, आईएनएस माहे और आईएनएस अंजदीप को नौसेना में शामिल किया जा चुका है. ये पोत एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है. यह जहाज 25 नॉट की रफ्तार से चल सकता है और तक़रीबन 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम है. तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगा सकता है.

समुद्र के अंदर का स्थितियों का सर्वे करेगा संशोधक

समुद्र के अंदर की स्थितियों को समझने और हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने के लिए आधुनिक सर्वे जहाजों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है. इन्हीं सर्वेक्षणों के आधार पर सुरक्षित नेविगेशन के लिए समुद्री चार्ट तैयार किए जाते हैं. भारतीय नौसेना ने 30 अक्टूबर 2018 को चार बड़े सर्वे जहाजों के निर्माण का कांट्रेक्ट दिया था. इस कड़ी में आईएनएस संध्याक और आईएनएस निर्देशक साल 2024 में नौसेना में शामिल किए गए थे, जबकि आईएनएस इक्षक को 2025 में बेड़े का हिस्सा बनाया गया. अब चौथा और आखिरी लार्ज सर्वे वेसेल संशोधक नौसेना में शामिल होने जा रहा है. 110 मीटर लंबा और लगभग 3,800 टन वजनी यह जहाज दो डीजल इंजनों से संचालित है. ह 25 दिनों से ज्यादा समय तक समुद्र में रहने में सक्षम है. संशोधक, समुद्र तल की स्कैनिंग कर सुरक्षित नेविगेशन रूट के लिए समुद्री चार्ट तैयार करने के साथ-साथ हाइड्रोग्राफिक सर्वे भी करेगा.

Spread the love