स्विट्जरलैंड के ओबर्गेन में ईरान युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से ईरान और अमेरिका के बीच चल रही उच्च स्तरीय कूटनीतिक वार्ता सोमवार तड़के समाप्त हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी धमकियों और कड़े बयानों से उपजे तनाव के बावजूद, दोनों देश लेबनान में जारी संघर्ष को रोकने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ (टकराव रोधी प्रकोष्ठ) के गठन पर सहमत हुए हैं। 60 दिन की इस कूटनीतिक प्रक्रिया के पहले चरण की समाप्ति पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए पाकिस्तान और कतर की जमकर प्रशंसा की है।
मध्यस्थ देशों—पाकिस्तान और कतर—की ओर से जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ में लेबनान की सरकार भी शामिल होगी। इसका मुख्य काम लेबनान में सैन्य अभियानों की समाप्ति और शांति का पालन सुनिश्चित करना होगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह कदम ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच जारी भीषण जंग को रोकने के लिए काफी होगा या नहीं। लेबनान के कई हिस्सों पर काबिज इजरायल का स्पष्ट कहना है कि वहां उसकी मौजूदगी बनी रहेगी और उत्तरी इजरायल पर हमले करने वाले चरमपंथियों से निपटने के लिए उसे पूरी तरह से ‘खुली छूट’ चाहिए।
60 दिन में अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए रोडमैप
बयान में कहा गया कि सम्मेलन में 60 दिनों के अंदर अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई गई है, जिससे आगे की तकनीकी बातचीत तुरंत शुरू की जा सके। साथ ही, समझौता ज्ञापन के बिंदु 5 में बताए गए समय के लिए पार्टियों के बीच एक संचार लाइन बनाई गई है, ताकि वाणिज्यिक जहाजों के होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकलते समय किसी भी तरह की घटना और गलतफहमी से बचा जा सके।
ट्रंप के कड़े बयानों से वार्ता में आया था तनाव
रविवार को स्विट्जरलैंड में बातचीत की शुरुआत बेहद तनावपूर्ण रही थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि ईरानी राष्ट्रपति को अपने बयानों के प्रति सावधान रहना चाहिए। ट्रंप ने लिखा, “ईरान को लेबनान में अपने हाई-पेड प्रॉक्सी (हिजबुल्लाह) को तुरंत रोकना चाहिए। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर पिछले हफ्ते से भी कहीं अधिक मजबूती से प्रहार करेंगे।”
इन टिप्पणियों के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और मध्यस्थों के लिए ईरान को बातचीत की मेज पर बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसके जवाब में ईरान के प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “हमारे सशस्त्र बल अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं। वे केवल बात कर सकते हैं, जबकि हम कार्रवाई करते हैं।” लेकिन बाद में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कतर और पाकिस्तान की ‘अथक मध्यस्थता’ की सराहना करते हुए इसे लेबनान युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति बताया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर गहन चर्चा
इस उच्च स्तरीय बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जिसमें ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ भी शामिल थे। ईरानी मीडिया के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लगभग 80 मिनट तक बातचीत हुई। वार्ता में शामिल एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के तंत्र और दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम लागू करने के साथ-साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी ‘गहन’ चर्चा हुई।
उच्च स्तरीय समिति करेगी निगरानी
पाकिस्तान ने बयान में कहा कि लेक ल्यूसर्न समिट एक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में हुआ। बयान में कहा गया कि समझौता ज्ञापन के आधार पर अमेरिका-ईरान एक उच्च स्तरीय समिति बनाने पर सहमत हुए, जो मध्यस्थता पर राजनीतिक निगरानी रखेगी। मुख्य वार्ताकार नियमित तौर पर उच्च स्तरीय समिति को रिपोर्ट करेंगे और परमाणु, प्रतिबंध और एक मॉनिटरिंग और विवाद समाधान समूह पर फोकस करने वाले समूह का नेतृत्व करेंगे, ताकि समझौते को असरदार तरीके से लागू किया जा सके।

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