कोलकाता। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित भव्य योग कार्निवाल में ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई जिसने हजारों लोगों को भावुक कर दिया। दमदम के रहने वाले उदय कुमार ने साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे शारीरिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
उदय कुमार की जिंदगी में वर्ष 2015 में एक बड़ा हादसा हुआ था। लंबी दूरी की ट्रेन से फिसलकर गिरने के कारण उन्हें अपना एक पैर गंवाना पड़ा। इस दुर्घटना के बाद वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे। हालात इतने कठिन हो गए थे कि उन्होंने आत्महत्या तक का प्रयास किया था।
योग बना नई जिंदगी की ताकत
हादसे के बाद उदय ने योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। उनका कहना है कि योग ने उन्हें मानसिक मजबूती दी और जीवन में आगे बढ़ने का नया हौसला दिया। योग के जरिए उन्होंने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि अपनी सीमाओं को भी चुनौती दी।
एक पैर से पर्वतारोहण, अब एवरेस्ट पर नजर
आज उदय कुमार एक सफल पर्वतारोही के रूप में पहचान बना चुके हैं। एक पैर होने के बावजूद वह कई पर्वतारोहण अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा कर चुके हैं और उनके नाम कई पुरस्कार भी दर्ज हैं। अब उनका अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करना है।
रेड रोड के योग कार्निवाल में दिखा उत्साह
रेड रोड पर आयोजित योग कार्यक्रम में शामिल होकर उदय कुमार ने कहा, “यह बंगाल के हर व्यक्ति के लिए गर्व का दिन है। प्रधानमंत्री बंगाल आकर योग कर रहे हैं और हम भी उनके साथ योग कर रहे हैं। यह हमारे लिए बेहद गर्व की बात है।”
लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बने उदय
उदय कुमार की कहानी इस बात का उदाहरण है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी यदि मन मजबूत हो तो जीवन में नई शुरुआत की जा सकती है। योग ने उन्हें न केवल मानसिक शक्ति दी, बल्कि एक नई पहचान भी दिलाई। उनकी यह यात्रा आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

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