Udaan Desk. अमेरिका की तरफ से लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ के मामले में भारत को व्यापार वार्ताओं के जरिए बड़ी राहत मिलती दिख रही है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक, अमेरिका के साथ हुई ट्रेड बातचीत के दम पर भारत को अतिरिक्त टैरिफ के ‘लोअर टियर’ (निचले स्तर) में रखा गया है, जिससे देश के मुख्य निर्यातकों को बड़ा फायदा हुआ है।
मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका को होने वाले भारत के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां) और स्मार्टफोन शामिल हैं, पिछले हफ्ते लगाए गए अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
इसके अलावा स्टील, एल्युमिनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रोडक्ट भी इस अतिरिक्त 10 फीसदी टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं। इन सभी छूटों की बदौलत भारत के कुल अमेरिकी निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा अतिरिक्त टैरिफ के दायरे से बाहर हो गया है।
दूसरी तरफ, बाकी बचे 55 प्रतिशत निर्यात पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि इस हिस्से पर भी भारत पर लगने वाला टैरिफ दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है। सरकार अब इस मामले में जल्द से जल्द एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बायलैटरल ट्रेड एग्रीमेंट) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रही है।
हालांकि, जेनेरिक दवाओं पर ऊंचे टैरिफ लगाने की अमेरिकी योजना को लेकर भारतीय दवा निर्माताओं में चिंता जरूर बढ़ गई है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले साल से ही एक ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है। इससे पहले फरवरी में एक शुरुआती समझौता हुआ था, जिसमें भारतीय सामानों पर 18 फीसदी ड्यूटी तय की गई थी, लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद ट्रंप के उन रेसिप्रोकल टैरिफ्स को अमान्य कर दिया गया था। इसके अलावा, इस महीने भारत ने अमेरिका की उन चेतावनियों का भी कड़ा जवाब दिया था, जिसमें जबरन श्रम रोकने वाली नीतियों की कमी का आरोप लगाया गया था।

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