Udaan Desk. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की रियायती स्वैप सुविधा के तहत जुटाई गई फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट-बैंक (एफसीआरएन-बी) जमा राशि केवल 45 दिनों में 2013 की योजना के दौरान जुटाई गई राशि को संभवतः पार कर चुकी है। ऐसे में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च ने इस योजना के तहत आने वाले धन का अनुमान बढ़ा दिया है।
एसबीआई रिसर्च का अब अनुमान है कि इस योजना के अंत तक एफसीआरएन-बी जमा राशि 65 से 70 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जो पहले के 40-45 अरब डॉलर के अनुमान से काफी अधिक है। ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉन्ड (ओएफसीबी) और बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) सहित कुल आवक 80 से 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
इस बीच हिंदू बिजनेसलाइन को दिए एक साक्षात्कार में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए केंद्रीय बैंक के हालिया उपायों ने बैंकों को एफसीआरएन-बी जमा के माध्यम से लगभग 32 अरब डॉलर जुटाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि जून में उपायों की घोषणा के बाद से विदेशी निवेशकों ने सरकारी प्रतिभूतियों में अलग से 7 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है।
मल्होत्रा ने कहा कि उभरते बाजारों के सामने चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के संदर्भ में उपायों को देखा जाना चाहिए और इनसे भारत के भुगतान संतुलन और मुद्रा स्थिरता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। 17 जुलाई तक इसकी रियायती स्वैप सुविधा के माध्यम से 20.72 अरब डॉलर जुटाए गए थे। इसमें से एफसीआरएन-बी जमा का हिस्सा 17.41 अरब डॉलर था, जबकि ओएफसीबी और ईसीबी में क्रमशः 1.97 अरब डॉलर और 1.34 अरब डॉलर आए थे। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि 23 जुलाई तक अकेले एफसीआरएन-बी से धन की आवक 26 से 28 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो 2013 के स्तर से अधिक है।

Related Posts
हिंदुस्तान जिंक का बड़ा विस्तार प्लान, इस FY 5,000 करोड़ रुपए का करेगी निवेश
ओडिशा में बनेगा देश का पहला AI-ऑप्टिमाइज्ड डेटा सेंटर, HCLTech करेगी ₹14,257 करोड़ का निवेश
विप्रो का बड़ा ऐलान : 2 बड़े ब्रांड खरीदेगी कंपनी, होम और पर्सनल केयर कारोबार होगा और मजबूत