मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।
भोपाल स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी का गमछा पहनाकर भाजपा की सदस्यता दिलाई और स्वागत किया। राकेश सिंह यादव के भाजपा में शामिल होने को कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियां तेज हैं।
इस्तीफे के बाद लग रही थीं अटकलें
राकेश सिंह यादव ने पिछले सप्ताह कांग्रेस के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज थीं, जो अब सच साबित हो गईं। इंदौर क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले राकेश सिंह यादव लंबे समय से कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे हैं। उनके पार्टी छोड़ने को प्रदेश कांग्रेस के लिए संगठनात्मक नुकसान के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस को मिले राजनीतिक झटकों के बीच यह घटनाक्रम पार्टी की मुश्किलें और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
जीतू पटवारी और हरीश चौधरी पर लगाए थे गंभीर आरोप
इस्तीफा देने के दौरान राकेश सिंह यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि जीतू पटवारी इस पद के लिए उपयुक्त नहीं हैं और उनके नेतृत्व में संगठन लगातार कमजोर हो रहा है। राकेश सिंह यादव ने यह भी कहा था कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र समाप्त हो चुका है और असहमति जताने वाले कार्यकर्ताओं की आवाज दबाई जाती है। इसके अलावा उन्होंने प्रदेश संगठन प्रभारी हरीश चौधरी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। यादव ने दावा किया था कि पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान टिकटों की सौदेबाजी हुई थी और इसके बदले महंगी डिफेंडर कार दिए जाने का आरोप भी लगाया था।
आरोपों पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार
राकेश सिंह यादव के भाजपा में शामिल होने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर कांग्रेस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं भाजपा ने इसे अपने संगठन के विस्तार और कांग्रेस में बढ़ते असंतोष का संकेत बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इंदौर और मालवा क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले नेता के भाजपा में शामिल होने से आगामी राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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