अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए तनाव के बाद दुनिया को फिर यह चिंता सताने लगी थी कि एक बार फिर मिडिल ईस्ट तनाव लंबे समय तक चलेगा। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ रूप से कहा है कि तेल क्षेत्र को इस समय चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि चाहे कोई भी स्थिति हो युद्ध लंबा नहीं खींचेगा। ट्रंप का कहना है कि यदि ईरान की तरफ से जवाबी कार्यवाही की जाती है तो भी अमेरिका और ज्यादा बड़े हमले करके युद्ध को जल्द ही समाप्त कर देगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद दुनिया की तेल की कीमतों में बढ़ोतरी की चिंता कम हो सकती है। ट्रंप ने कहा है कि चाहे जो भी हो यह जल्दी समाप्त हो जाएगा। अमेरिका की कोशिश रहेगी की हालत को सुरक्षित बनाया जाए और तेल बिना किसी रोक-टोक के आसानी से बिके।
दोनों देशों के बीच की सहमति टूटी
ईरान की तरफ से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर किए हमलों के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देशों के बीच की अस्थाई सहमति टूट चुकी है। अमेरिका की तरफ से किए गए हमले ईरान के हमलों की जवाबी कार्यवाही है।
हालांकि एक तरफ तो ट्रंप कह रहे हैं कि यह तनाव जल्दी ही समाप्त हो जाएगा और दूसरी तरफ चल ही अमेरिका की तरफ से यह संकेत मिल रहे थे कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की शुरुआत होने वाली है।
ईरान ने मंगलवार को कुछ जहाज को निशाना बनाया था जिसके बाद अमेरिका ने हमले शुरू किए। अब अमेरिका का चुका है कि यदि ईरान की तरफ से फिर हमले किए जाते हैं तो उनकी कार्यवाही 10 गुना बढ़ सकती है।
ट्रंप के बयान का तेल की कीमतों पर असर
भले डोनाल्ड ट्रंप ने आशा जताई है कि तनाव जल्दी समाप्त हो जाएगा और तेल पर इसका असर नहीं होगा। लेकिन बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी जारी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 74 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुका है। कीमतें पिछले दो सप्ताह के अपने उच्चतम स्तर पर है।
ईरान ने शुरू की जवाबी कार्यवाही
अमेरिकी हम लोग के जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत पर हमले शुरू कर दिए हैं। 17 जून 2026 को दोनों देशों के बीच में शांति स्थापित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद दोनों अपनी-अपनी शर्तों को लेकर कई बार बातचीत कर चुके हैं। लेकिन मुद्दा अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मूज पर नियंत्रण का है। ईरान चाहता है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर उसकी पूरी तरह से नियंत्रण हो और उसी के नियमों के अनुसार जहाजों की आवाजाही हो। लेकिन अमेरिका इस पर अपना नियंत्रण चाहता है।

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