आगामी चुनावों को देखते हुए देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस अपने सांगठनिक ढांचे में एक व्यापक और अभूतपूर्व फेरबदल करने की अंतिम रूपरेखा तैयार कर चुकी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के भीतर और विभिन्न राज्यों के प्रादेशिक नेतृत्व में एक बड़े बदलाव की आहट अब पूरी तरह तेज हो गई है। पार्टी आलाकमान आगामी चुनावी चुनौतियों का सामना करने और चुनावी राज्यों में संगठन को नए सिरे से धार देने के लिए इस बड़े ‘ऑपरेशन क्लीन’ को अंजाम देने जा रहा है। सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस सांगठनिक सर्जरी के तहत पार्टी के कई कद्दावर नेताओं की कुर्सियां खिसकना पूरी तरह तय माना जा रहा है, जिससे पार्टी के आंतरिक गलियारों में भारी खलबली मच गई है।
राष्ट्रीय सचिवों की संख्या में होगी भारी कटौती
इस बड़े सांगठनिक फेरबदल का सबसे बड़ा असर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य प्रभारियों पर पड़ने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के चार वरिष्ठ महासचिवों की पद से छुट्टी की जा सकती है। इसके साथ ही, छह से सात राज्यों के मौजूदा प्रदेश प्रभारियों को उनके पदों से हटाकर नए चेहरों को मौका देने की तैयारी है। सांगठनिक ढांचे को चुस्त-दुरुस्त और छोटा करने के उद्देश्य से वर्तमान में कार्यरत 62 राष्ट्रीय सचिवों में से करीब 26 राष्ट्रीय सचिवों की बड़े पैमाने पर छुट्टी की जाएगी। इस प्रशासनिक सर्जरी के पीछे आलाकमान की रणनीति उन नेताओं को हटाने की है जो या तो अन्य चुनावी भूमिकाओं में व्यस्त हैं या जिनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।
सचिन पायलट समेत इन बड़े प्रभारियों की विदाई तय
पार्टी के भीतर से आ रही खबरों के मुताबिक, जिन प्रमुख प्रभारियों को हटाया जाना तय माना जा रहा है, उनमें हरियाणा प्रभारी बीके हरिप्रसाद, महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला, छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडंकर और राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम शामिल हैं। इन बड़े बदलावों के पीछे राजनीतिक और व्यावहारिक कारण हैं।
बीके हरिप्रसाद हाल ही में कर्नाटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पदभार संभाल चुके हैं, जिसके कारण हरियाणा में उनकी जगह किसी नए चेहरे को पार्टी प्रभारी या महासचिव नियुक्त किया जाएगा। इसी तरह, केरल में कांग्रेस की सरकार आने के बाद रमेश चेन्निथला वहां कैबिनेट मंत्री बन चुके हैं, इसलिए महाराष्ट्र के प्रभारी पद पर नए नेता की ताजपोशी होगी। वहीं, केरल के प्रदेश अध्यक्ष सन्नी जोसेफ भी मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं, जिसके चलते संगठन से उनकी विदाई तय है। तमिलनाडु का प्रभार देख रहे गिरीश चोडंकर को बीते दिनों गोवा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के कारण अब AICC से उनकी छुट्टी होना तय माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में बदलेंगे प्रदेश अध्यक्ष
केंद्रीय संगठन के साथ-साथ प्रादेशिक स्तर पर भी बड़े बदलावों की रूपरेखा खींची गई है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपने नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा कर सकती है। विशेष रूप से पंजाब और उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में होने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों को देखते हुए इन राज्यों में प्रादेशिक कमान का बदलना बेहद अहम माना जा रहा है। आलाकमान का मुख्य उद्देश्य इन राज्यों में पार्टी के भीतर लंबे समय से जारी गुटबाजी और अंतर्कलह को पूरी तरह थामना है। नए और ऊर्जावान चेहरों को जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकने और एक मजबूत सांगठनिक चक्रव्यूह तैयार करने का प्रयास कर रही है।
बदलावों का राजनीतिक प्रभाव और आलाकमान का अंतिम संदेश
कांग्रेस आलाकमान द्वारा उठाए जा रहे ये कड़े कदम स्पष्ट करते हैं कि पार्टी अब आगामी चुनावों को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। ‘एक व्यक्ति एक पद’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने और चुनावी राज्यों में पूर्णकालिक नेतृत्व देने की यह कवायद पार्टी की भविष्य की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले कुछ दिनों में इन बदलावों पर आधिकारिक मुहर लगते ही कांग्रेस के भीतर एक नए युग की शुरुआत होगी। इन सांगठनिक फेरबदलों के दूरगामी परिणाम न केवल कांग्रेस के आंतरिक ढांचे पर दिखाई देंगे, बल्कि आगामी विधानसभा और राष्ट्रीय चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन और उसकी राजनीतिक साख को भी सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।

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