जापान की पैनासोनिक एनर्जी की सहायक कंपनी पैनासोनिक एनर्जी इंडिया (पीईसीआईएन) मध्य प्रदेश में अपनी एकमात्र भारतीय बैटरी निर्माण इकाई को बंद कर सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अकिओ फुजिता ने बताया कि उच्च अनुपालन लागत और सरकार के बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों से जुड़ी जटिलताओं के कारण उन्हें कामकाज समेटने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
फुजिता ने आगाह किया कि यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं होता है तो 1972 से भारत में संचालित विनिर्माण इकाई को अनुपालन जटिलताओं और कारोबार करने में कठिनाइयों के कारण बंद करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी एक साल से भी अधिक समय से सरकार के साथ नए नियमों के कार्यान्वयन से संबंधित विशिष्ट मुद्दों पर चर्चा कर रही है लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है।
फुजिता ने बताया कि यदि सुधारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो अनुपालन लागत मुनाफे से अधिक हो जाएगी। यह बिक्री को भी खत्म कर देगी और ड्राई बैटरी उद्योग की स्थिरता पर भी खतरा होगा। पैनासोनिक के भारतीय संयंत्र को भी संचालन जारी रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
पैनासोनिक एनर्जी इंडिया गुजरात के वडोदरा में केंद्रित है और मध्य प्रदेश के धार जिले के पीथमपुर में ड्राई सेल जिंक-कार्बन विनिर्माण कारखाने का संचालन करती है। ताजा वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी में मार्च 2025 के अंत तक 679 कर्मचारी थे। 54 करोड़ नग बैटरी की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाले कारखाने में 283 कर्मचारी काम करते हैं। पैनासोनिक एनर्जी चेन्नई में पैनासोनिक कार्बन इंडिया के तहत ड्राई बैटरियों के लिए कार्बन रॉड बनाने वाले एक कारखाने का भी संचालन करती है।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और पोर्टेबल बैटरी के साथ-साथ वाहन और औद्योगिक बैटरी उद्योग से जुड़े हितधारकों से परामर्श के बाद अगस्त 2022 में नए नियम अधिसूचित किए थे। ये प्रावधान बैटरी मूल्य श्रृंखला के सभी हिस्सों पर लागू होते हैं, जिनमें विनिर्माता, डीलर और अपशिष्ट बैटरी के संग्रह, पृथक्करण, परिवहन और पुनर्चक्रण से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं।
ये नियम विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) की अवधारणा पर आधारित हैं, जिसमें बैटरी के विनिर्माता और आयातक अपशिष्ट बैटरी के संग्रह और पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार होते हैं। हालांकि बैटरियों के लिए कड़े संग्रह और पुनर्चक्रण लक्ष्य ड्राई बैटरी विनिर्माताओं के लिए चुनौतियां पैदा कर रहे हैं।
नए नियमों के तहत विनिर्माताओं को बाजार में बेची गई बैटरियों को उनकी लाइफ की परिभाषित समय सीमा के भीतर एकत्र करना होगा। वर्ष 2025-26 के लिए संग्रह लक्ष्य 2022-23 में कंपनी द्वारा बेची गई बैटरियों का 50 फीसदी निर्धारित किया गया था।
यह 2026-27 में 60 फीसदी तक बढ़ गया है और बाद के वर्षों में धीरे-धीरे और इजाफा करने का प्रावधान है। इन लक्ष्यों को पूरा नहीं करने पर विनिर्माताओं पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। यह 3,900-4,000 करोड़ रुपये के भारत के ड्राई सेल बैटरी बाजार को झटका दे सकता है। भारत के ड्राई सेल बैटरी बाजार में पीईसीआईएन की हिस्सेदारी 19 फीसदी है।
पीईसीआईएन के अनुसार नियमों में विभिन्न प्रकार की बैटरियों के बीच अंतर को पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखा गया है। यह रासायनिक संरचना, प्रौद्योगिकी, अनुप्रयोग और आकार में बहुत भिन्न होती हैं। कंपनी ने कहा कि ड्राई बैटरियों में मुख्य धातुएं जिंक और मैंगनीज हैं लेकिन संस्थागत अवधारणाएं और गणना तर्क लिथियम आधारित बैटरियों को मानते हैं और ड्राई बैटरियों पर भी वही मानक लागू होते हैं।
सरकार ने सितंबर 2024 में पर्यावरणीय मुआवजा दिशानिर्देशों को भी अधिसूचित किया है, जिसमें पुनर्चक्रण लागतों के लिए न्यूनतम और ऊपरी सीमाएं निर्धारित की गईं जिसे विनिर्माताओं को वहन करना होगा। हालांकि पीईसीआईएन के अनुसार नियमों द्वारा निर्धारित पुनर्चक्रण इकाई मूल्य की समीक्षा की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए जिंक पुनर्चक्रण के लिए इकाई मूल्य, जिंक कच्चे माल की कीमत से 240 फीसदी अधिक निर्धारित किया गया है।
फुजिता ने कहा, ‘परिणामस्वरूप सबसे कम इकाई मूल्य पर भी अनुपालन लागत उद्योग के मुनाफे से लगभग चार गुना अधिक है जो पूरे ड्राई बैटरी क्षेत्र के अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है। यह भारत में पैनासोनिक के बैटरी व्यवसाय पर भी लागू होता है, जो अंततः भारत में उत्पादन को रोक सकता है।’ कंपनी के अनुसार ड्राई सेल बैटरियों के बहुत छोटे आकार, कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली अनूठी रासायनिक संरचना और कम अवशिष्ट मूल्य के कारण संग्रह पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए कोई वाणिज्यिक मामला नहीं बनता है।
नियमों में 2027 से नए बैटरियों के बनाने में सामग्री का दोबारा न्यूनतम उपयोग के संबंध में भी दायित्व निर्धारित किया गया है जो 5 फीसदी से शुरू होगा। पीईसीआईएन के अनुसार कंपनियों को 5 फीसदी दोबारा उपयोग को अनिवार्य करने से पहले दो साल का और समय दिया जाना चाहिए।
बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध पैनासोनिक एनर्जी इंडिया ने वित्त वर्ष 2026 में 273 करोड़ रुपये की कुल आय दर्ज की और मुनाफा 3.49 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने 11.77 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

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