आजकल बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल, टैबलेट, टीवी और लैपटॉप के सामने बीत रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई, वीडियो गेम्स और सोशल मीडिया ने उनकी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा घेर लिया है। लेकिन इसका असर सिर्फ आंखों पर ही नहीं, बल्कि उनकी हड्डियों और सेहत पर भी पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में Vitamin D की कमी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि कई बच्चे बाहर से बिल्कुल स्वस्थ दिखते हैं, लेकिन जांच में उनके शरीर में Vitamin D की कमी पाई जा रही है।
क्यों बढ़ रही है Vitamin D की कमी?
Vitamin D का सबसे बड़ा प्राकृतिक स्रोत धूप है। लेकिन अब कई बच्चे दिनभर घर के अंदर रहते हैं और धूप में बहुत कम समय बिताते हैं। मदरहुड हॉस्पिटल, नोएडा के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित गुप्ता के अनुसार, कई बच्चे रोजाना 30 मिनट भी बाहर नहीं निकलते। स्कूल, ट्यूशन और स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय उनके आउटडोर एक्टिविटी को लगातार कम कर रहा है।
Vitamin D की कमी से क्या हो सकता है?
डॉक्टरों के मुताबिक Vitamin D की कमी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआत में इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। इसके कारण बच्चों में:
* हड्डियां कमजोर हो सकती हैं
* मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी हो सकती है
* बार-बार थकान महसूस हो सकती है
* ग्रोथ प्रभावित हो सकती है
* फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है
* संक्रमण जल्दी हो सकता है बच्चों के लिए धूप क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना कुछ समय धूप में बिताने से शरीर खुद Vitamin D बनाता है। यही Vitamin D हड्डियों को मजबूत रखने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि बच्चों को रोज कम से कम 45 से 60 मिनट बाहर खेलना चाहिए। सुबह की हल्की धूप इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। खान-पान का भी रखें ध्यान धूप के साथ-साथ सही खान-पान भी जरूरी है। बच्चों की डाइट में ये चीजें शामिल की जा सकती हैं:
* दूध, दही, पनीर और चीज
* बादाम और रागी
* हरी पत्तेदार सब्जियां
* अंडे की जर्दी – Egg Yolk
* मशरूम
* सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियां
कब डॉक्टर से सलाह लें?
अगर बच्चा बार-बार थका हुआ महसूस करता है, हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द की शिकायत करता है, उसकी ग्रोथ धीमी लगती है या वह पहले की तुलना में कम एक्टिव हो गया है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर Vitamin D की जांच या सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या धूप की कमी नहीं, बल्कि धूप में समय न बिताने की है। इसलिए बच्चों को स्क्रीन से थोड़ा दूर और मैदान के थोड़ा करीब लाना उनकी सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

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