हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी रवैये को लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ती चिंताओं के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद में कहा कि भारत विकास का रास्ता अपनाता है, विस्तारवाद का नहीं। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और वरिष्ठ मंत्रियों सहित सांसदों को संबोधित करते हुए मोदी ने दोनों देशों के बीच संबंधों को और बढ़ाने का आह्वान किया और कहा कि जब भारत के 140 करोड़ लोग और इंडोनेशिया के 29 करोड़ नागरिक मिलकर साझा समृद्धि के लिए आगे बढ़ेंगे तो दुनिया इतिहास बनते हुए देखेगी।
पीएम मोदी के भाषण की बड़ी बातें
समुद्र पर सबका हक : दक्षिण चीन सागर में चीन की मनमानी के बीच पीएम मोदी ने कहा कि भारत चाहता है कि हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र सभी के लिए खुला और सुरक्षित हो, जहां जहाजों को आने-जाने की पूरी आजादी मिले. उन्होंने कहा कि समुद्र हमारे बीच दूरी नहीं बढ़ाता, बल्कि हमें आपस में जोड़ता है.
लोकतंत्र की ताकत : पीएम ने कहा कि जब भारत और इंडोनेशिया जैसे लोकतांत्रिक देश एक साथ आते हैं, तो दुनिया का भरोसा बढ़ता है कि लोकतंत्र से ही बेहतर भविष्य बनता है.
आतंकवाद पर मिलकर वार : दोनों देश मिलकर आतंकवाद, साइबर खतरों और कट्टरपंथ के खिलाफ लड़ेंगे ताकि शांति चाहने वाले लोगों को मजबूती मिले.
UN में बदलाव की मांग : दुनिया के मौजूदा हालातों को देखते हुए पीएम ने कहा कि अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बदलाव करने में और देरी नहीं होनी चाहिए.
रक्षा और व्यापार को लेकर 12 समझौते
संसद में भाषण देने से पहले पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ बड़ी बैठक की. इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी, खेती-किसानी, दवाइयों और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए करीब 12 समझौतों पर साइन किए गए.
पीएम मोदी का तीन देशों का दौरा
प्रधानमंत्री मोदी तीन देशों की यात्रा पर हैं. इस दौरे के पहले कदम के रूप में वे सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे, जहां उनका जोरदार स्वागत हुआ. इंडोनेशिया के बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर जाएंगे.

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