- सामने आया नया एंगल, नवाब परिवार सिर्फ निगराह, रुबात की जगह सऊदी सरकार की
- मर्जर एग्रीमेंट भी चर्चाओं में
भोपाल। सऊदी अरब सरकार… भारत सरकार… नवाब परिवार… केयर टेकर… विधायक… रुबात के चाहतमंद… समाज के लोग….! सऊदी अरब में मौजूद मक्का और मदीना रुबात को लेकर जितना बात की जाए, उतने एंगल सामने आते जा रहे हैं। इस मामले में जहां विधायक और कारोबारी आमने सामने की लड़ाई में मशगूल हैं, वहीं तस्वीर का एक तीसरा एंगल बताया जा रहा है। इस बिंदु पर रुबात का असल मालिक न नवाब या उनके परिवार को माना जा रहा है, न ही अवाम का सीधा अधिकार इस पर बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इन रुबात का निर्माण सऊदी सरकार ने ही जमीन मुहैया करवा कर नवाबों को दी थी, ताकि उनकी रियासत के लोग इसमें आसान और मुफ्त ठहराव कर सकें।

स्वयंसेवी संस्था नया कारवां के फाउंडर मो. तारिक का कहना है कि इस मामले में मर्जर एग्रीमेंट में उल्लेख मौजूद है। जिसमें कहा गया है कि रियासत भोपाल के जो अधिकार थे वही कायम रहेंगे उस अधिकार में मक्का मदीना रुबात का जो पूर्व निर्माण तत्कालीन सऊदी अरब सरकार द्वारा ही जमीन मुहैया कराई गई थी। बरसों पहले हुए इस निर्माण के लिए भारत सहित कई देशों व उनकी रियासतों के नवाबों को जिम्मेदारी दी गई थी। जिसमें यह शामिल था कि इन मुस्लिम रियासत के नवाब रुबात का निर्माण कराएंगे, जिनका फायदा रियासत की अवाम को हज के दौरान मिलता रहेगा। तय यह भी किया गया था कि रियासती महकमा शाही ओकाफ के अधीन जो भी संपत्तियां होंगी, उनका रखरखाव और देखरेख का जिम्मा हमेशा नवाब या उनके परिवार को रहेगा। इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
मो. तारिक का कहना है कि अन्य रियासतों की तरह भोपाल रियासत को भी यह लाभ मिलता रहा। शाही ओकाफ के गठन से पहले तक इसकी जिम्मेदारी दारुल कजा और इफ्ता के पास रही है। इस ओकाफ के गठन के बाद ही जिम्मेदारी बदलकर शाही परिवार के पास पहुंची है। वे यह भी कहते हैं कि मक्का और मदीना में निर्माण और विस्तार कार्यों के समय कई बार रुबात की जगह बदली गई है और इसके लिए सऊदी सरकार ने नई जगह का आवंटन किया है। ताजा हालात को देखते हुए मो. तारिक कहते हैं कि इस मामले में सियासत और जोरआजमाइश करने की बजाए फैसला उलेमाओं पर छोड़ देना चाहिए, ताकि इसका बेहतर हल निकले और भोपाल रियासत के हाजियों को रुबात का फायदा मिलता रहे।

नजर यहां भी लगी

रुबात से पिछले कई सालों से फायदा न मिल पाने को लेकर विवाद फैला हुआ है। विधायक आरिफ मसूद द्वारा जनता की इस आवाज को बुलंद करने और इस दौरान कुछ इल्जाम लगाए गए। जिस पर शाही ओकाफ के जिम्मेदार सिकंदर हफीज ने उनसे 7 दिन में माफी मांगने के लिए कहा है। इसके बाद वे विधायक मसूद के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई कर सकते हैं। गुरुवार को जारी किए गए इस बयान को अब तक 3 दिन गुजर चुके हैं, जबकि अगले 3 दिन में मामला अलग रूप ले सकता है।
उलेमाओं और शहर के जिम्मेदारों की बारी
कहा जा रहा है कि इस मामले में अब शहर के उलेमाओं और बात का वजन रखने वाले जिम्मेदार शहरियों की भूमिका बढ़ गई है। यह लोग आपसी समझाइश से इस मामले का पटाक्षेप कर सकते हैं। जिससे इस हज तो हाजियों के मजा मक्का मदीना जाने का समय गुजर गया, लेकिन अगले साल से उन्हें इसका फायदा मिल सकता है।

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