August 11, 2026

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कबाड़ बीनने वाले के बेटे ने क्रैक किया NEET, जानिए उनकी सफलता की कहानी

Udaan Desk. आर्थिक तंगी, सीमित संसाधनों और निरंतर संघर्ष के बीच कोटा के एक बेटे सागर रेगर ने अपनी मेहनत के दम पर मिसाल पेश की है. वह कोटा के कैथून कस्बे के पास स्थित गोड्ल्याहेड़ी गांव के रहने वाले हैं. आइए जानते हैं कि उनकी सक्सेस स्टोरी के बारे में.

जानिए कितने मार्क्स और रैंक के साथ क्रैक किया NEET?
सागर रेगर ने NEET UG में 564 अंक और 98.6296 परसेंटाइल हासिल किया है. अपनी मेहनत के दम पर उन्होंने अखिल भारतीय रैंक (AIR) 27,157 और SC कैटेगरी में 684वीं रैंक प्राप्त की. इस मार्क्स के साथ उन्हें अच्छे मेडिकल काॅलेज में एडमीशन मिलने की संभावना है.

क्या है उनका एजुकेशन बैकग्राउंड?
सागर रेगर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कैथून के सरकारी स्कूल से पूरी की है. यहां उन्होंने क्लास 10 में 76% प्राप्त किया। वहीं क्लास 12 में उन्होंने 92% अंक प्राप्त किए हैं. मीडिया के साथ इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनने के बाद वे न केवल मरीजों का इलाज करना चाहते हैं, बल्कि आज के जनरेशन में एजुकेशन और ड्रग्स फ्री लाइफ के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना चाहते हैं.

क्या थी उनकी मोटिवेशन?
सागर बताते हैं कि उनकी बुआ की बेटी को लंबे समय तक गुटखा के सेवन के बाद कैंसर हो गया था. बहन की बीमारी और उसके दर्द को देखने के बाद सागर को डॉक्टर बनकर लोगों का इलाज करना और समाज को ड्रग्स फ्री बनाने का सूझा था.

क्या है उनकी फैमली बैकग्राउंड?
इंटरव्यू में सागर रेगर ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पिता ने साफ कह दिया था, कि वे मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का खर्च नहीं उठा सकते हैं. इस दौरान कैथून के सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने उनका मार्गदर्शन किया और उन्हें शिक्षा संबल योजना के बारे में बताया. इस योजना के तहत, उन्हें पूरे एक साल तक NEET की फ्री कोचिंग, रहने और भोजन की सुविधा भी मिली थी.

क्या करते थे उनके पिता?
सागर रेगर के पिता मुरली रेगर, घर-घर जाकर कबाड़ इकट्ठा करके पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं. सागर की मां हाउस वाइफ हैं, मगर जब सागर के पिता इकट्ठा किया हुआ कबाड़ लेकर घर लौटते हैं, तो सागर की मां उसे छांटने में उनकी मदद करती हैं.

पिता ने बताया कि आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण मेडिकल की कोचिंग का खर्च उठाना उनके लिए नामुमकिन था. हालांकि सागर ने काफी सीमित संसाधन और अपनी मेहनत के बल पर यह परीक्षा पास की है.

रहने के लिए मात्र 2 कमरे
पूरा परिवार एक साधारण से दो कमरों के घर में रहता है. सागर की दो छोटी बहनें भी हैं. बड़ी बहन मानसी कक्षा 12 में बायोलाॅजी की पढ़ाई कर रही है, जबकि छोटी बहन इशिका कक्षा 10 में पढ़ती हैं.

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