May 26, 2026

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हरियाणा में प्रदूषण पर सख्ती, 1 अक्टूबर से बिना PUCC वाहनों को नहीं मिलेगा फ्यूल

चंडीगढ़.

हरियाणा सरकार ने एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक आधारित कार्ययोजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है. सरकार ने फैसला लिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से जिन वाहनों के पास वैध प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र (PUC) नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा. यह नियम एनसीआर क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों पर लागू किया जाएगा.

हरियाणा में प्रदूषण कम करने के लिए ​ पर जोर
प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने बताया कि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है. इसके तहत सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

सरकार ईवी नीति के तहत करेगी काम
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026 तक एनसीआर के प्रमुख शहरों में 925 इलेक्ट्रिक बसें चलाने का है. इनमें से 575 बसों के खरीद आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं. गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत, करनाल, रोहतक और सोनीपत में इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. सरकार ईवी नीति के तहत लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन भी दे रही है.

बिना PUC वाले वाहनो की जाएगी पहचान
प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी. सरकार ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम लागू कर रही है, जिससे बिना PUC वाले वाहनों की पहचान की जा सकेगी. परिवहन विभाग ने पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ रोजाना कार्रवाई करने का लक्ष्य तय किया है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से कनेक्ट
उद्योगों की निगरानी भी अब पहले से ज्यादा सख्त होगी. हरियाणा में 1349 उद्योगों को ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इनमें से अधिकतर इकाइयों को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेटवर्क से कनेक्ट किया जा चुका है . सरकार सितंबर 2026 तक नए उत्सर्जन मानकों को पूरी तरह लागू करने की तैयारी कर रही है . अवैध और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की पहचान के लिए नया सर्वे भी कराया जाएगा.

सरकार का लक्ष्य
वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए राज्य में नए एयर मॉनिटरिंग स्टेशन भी लगाए जा रहे हैं. सरकार का लक्ष्य 30 सितंबर 2026 तक सभी जरूरी स्टेशन चालू करने का है, ताकि प्रदूषण वाले क्षेत्रों की समय पर पहचान की जा सके.

जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और जियो टैगिंग व्यवस्था लागू
इसके अलावा एनसीआर क्षेत्र में सड़कों के पुनर्विकास, निर्माण सामग्री और कचरा प्रबंधन पर भी काम तेज किया गया है. सरकार ने जीपीएस आधारित ट्रैकिंग और जियो टैगिंग व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं . अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों से पहले प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकतर काम पूरे कर लिए जाएंगे, जिससे आने वाले समय में एनसीआर के लोगों को प्रदूषण से राहत मिल सके.

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