September 11, 2026

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आयोग का संवैधानिक पद, लेकिन उपयोग पूरा सियासी

  • भोपाल से चुनाव लड़ने की जुगत में प्रियंक कानूनगो

खान आशु
भोपाल। आयोग की एक अलग मर्यादा, एक अलग जिम्मेदारी और निष्पक्षता का व्यवहार। लेकिन राजधानी के एक करीबी कस्बे से निकले एक आरएसएस और भाजपा नेता इस पद को राजनीतिक फायदे का आसान रास्ता मान बैठे हैं। रास्ता और तेवर भी नफरत फैलाने वाले ही अपनाए हुए हैं। वैसे तो आयोग की नियुक्ति को राजनीतिक फुल स्टॉप माना जाता है, लेकिन प्रियंक कानूनगो अब मन में भोपाल की किसी सीट से चुनाव लड़ने की मंशा लिए बैठे हैं।

नियम कहता है कि आयोग (कमीशन) के सदस्यों का सक्रिय राजनीति में बने रहना या राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से आयोगों में आना एक जटिल मुद्दा है, जो अक्सर निष्पक्षता और राजनीतिक प्रभाव के बीच बहस को जन्म देता है। भारत में संवैधानिक और वैधानिक आयोगों की प्रकृति के अनुसार इसके अलग-अलग पहलू हैं।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग में सदस्य प्रियंक कानूनगो की

भोपाल में बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। अलग-अलग मुद्दों पर उनके दौरे और बयान चर्चा में हैं। इकबाल मैदान विवाद से लेकर अरेरा कॉलोनी में अवैध शराब दुकानों का विरोध, तालाबों से अवैध कब्जा हटाने और पारंपरिक मछुआरों के अधिकार जैसे मुद्दों पर उनके लगातार दौरे और बयान उन्हें सुर्खियों में बनाए हुए हैं। जिस तरह वे जमीनी स्तर पर सीधे हस्तक्षेप करते नजर आ रहे हैं, उससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक संवैधानिक पद की जिम्मेदारी है या इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संकेत भी छिपा है।

बड़ी चर्चित घटनाएं

  • इकबाल मैदान नाम बदलने को लेकर बयान से सियासी विवाद
  • अवैध शराब दुकानों पर सख्ती की मांग
  • तालाबों से कब्जा हटाने को लेकर निर्देश
  • मछुआरों के पारंपरिक अधिकारों पर हस्तक्षेप
  • सोशल मीडिया के जरिए प्रशासनिक मामलों में सक्रियता

कौन है कानूनगो

हाल के महीनों में उन्होंने कई स्थानीय मुद्दों को उठाया। कई विषयों पर लगातार बयान दिए। उनके दौरे और निरीक्षण ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ाई। गौरतलब है कि प्रियंक कानूनगो का जन्म प्रदेश के विदिशा में हुआ। वे बचपन से ही सामाजिक और वैचारिक गतिविधियों से जुड़े रहे। उन्होंने कम उम्र में ही आरएसएस से जुड़कर सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में भाजपा के कार्यकर्ता बने। एनसीपीसीआर अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने आठ डिजिटल पोर्टल लॉन्च किए। इनमें बाल स्वराज कोविड केयर, POCSO ट्रैकिंग और MASI ऐप जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इनसे बाल अधिकारों की निगरानी को मजबूत किया गया। उन्होंने माइक्रोबायोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई की है। हालांकि उनका कार्यक्षेत्र प्रशासनिक और सामाजिक नीतियों में ज्यादा सक्रिय रहा है।

अचानक बढ़ी सक्रियता

भोपाल में प्रियंक कानूनगो की बढ़ती सक्रियता ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। अलग-अलग मुद्दों पर उनके दौरे और बयान चर्चा में हैं। अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह सक्रियता 2028 चुनाव की तैयारी है। सियासी गलियारों में इसे लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।

कहते हैं विश्लेषक

प्रदेश के कई जिलों में उनके कार्यक्रम, निरीक्षण और सोशल मीडिया एक्टिविटी ने स्थानीय स्तर पर बड़ा असर डाला है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि यह सक्रियता सामान्य नहीं है। खासकर 2028 विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या प्रियंक कानूनगो भोपाल की किसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी मौजूदगी ने सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए नई रणनीतिक स्थिति पैदा कर दी है।

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