नईदिल्ली। भारत में भुगतान की डिजिटल प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस-यूपीआई के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। 2016 में आज ही के दिन यूपीआई की शुरुआत हुई थी। 25 अगस्त 2016 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की देखरेख और National Payments Corporation of India (NPCI) द्वारा लॉन्च किया गया यूपीआई आज दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है। भुगतान की डिजिटल प्रणाली यूपीआई ने अभूतपूर्व व्यापकता और विश्वसनीयता के माध्यम से वैश्विक मान्यता प्राप्त की है। यह प्रणाली अब ग्यारह देशों में कार्यरत है।
यूपीआई भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के सबसे सफल स्तंभों में से एक है। यूपीआई से लेनदेन की मात्रा में लगभग 13 हजार गुना वृद्धि हुई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार वार्षिक लेनदेन की मात्रा 2016-17 में मात्र एक करोड़ 78 लाख थी, जो 2025-26 में बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई है।
इसी अवधि में लेन-देन का मूल्य भी 7,000 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीआई की एक दशक लंबी सफलता की सराहना की है। सोशल मीडिया पोस्ट में, प्रधानमंत्री ने यूपीआई को भारत के डिजिटल भुगतान सफर का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उन्होंने देशवासियों से अपने यूपीआई अनुभव साझा करने का आह्वान करते हुए कहा कि यूपीआई की व्यापक पहुंच और विस्तार पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
डिजिटल विभाजन के अंतर को समाप्त करने, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का विस्तार करके, यूपीआई ने देश भर में व्यक्तियों और समुदायों को सशक्त बनाया है, साथ ही व्यापक आर्थिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया है।
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि एक दशक पहले यूपीआई की शुरुआत हुई थी और यह भारत की डिजिटल पेमेंट यात्रा में अब तक का सबसे निर्णायक फैसला साबित हुआ है। यूपीआई के व्यापक पैमाने और पहुंच पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए। उन्होंने देशवासियों से कहा कि वे यूपीआई के साथ अपने अनुभव साझा करने को कहा।

Related Posts
स्टॉक मार्केट में इन नियमों को समझें, ट्रेडिंग से पहले अनुशासन है जरूरी
SBI और इसकी सहायक कंपनी NSE में बेचेंगी एक फीसदी हिस्सेदारी
GST Council की बड़ी बैठक 12 सितंबर को, रेट रेशनलाइजेशन से ITC नियमों तक इन मुद्दों पर रहेगी नजर