- भरतनाट्यम, रंगप्रवेशम, लाइव शास्त्रीय संगीत एवं पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति का दिखेगा अनोखा संगम
भोपाल। भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित भोपाल की अग्रणी सांस्कृतिक संस्था कालांजलि ने अपने प्रतिष्ठित वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव ‘27वां कालांजलि कलोत्सव’ आयोजित करने की घोषणा की है। यह बहुप्रतीक्षित आयोजन शुक्रवार, 12 जून 2026 को शाम 5:30 बजे रवीन्द्र भवन, भोपाल के हंसध्वनि सभागार में आयोजित किया जाएगा। यह अवसर भारतीय शास्त्रीय परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के प्रति कालांजलि की 27 वर्षों की अविराम प्रतिबद्धता का गौरवपूर्ण उत्सव है।
वर्ष 1998 में प्रख्यात भरतनाट्यम आचार्य गुरु श्री प्रदीप कृष्णन द्वारा स्थापित कालांजलि आज केवल एक नृत्य संस्था नहीं, बल्कि एक सशक्त सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में विकसित हो चुकी है। लगभग तीन दशकों से संस्था भारतीय कला एवं संस्कृति की मूल आत्मा को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्यरत है। गुरु श्री प्रदीप कृष्णन के दूरदर्शी नेतृत्व में कालांजलि ने सैकड़ों विद्यार्थियों को न केवल नृत्य और संगीत की उत्कृष्ट तकनीकी शिक्षा प्रदान की है, बल्कि अनुशासन, समर्पण, विनम्रता और सांस्कृतिक चेतना जैसे मूल्यों का भी संस्कार दिया है। इसी कारण कालांजलि आज मध्य भारत के सर्वाधिक सम्मानित शास्त्रीय कला संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है।
27वां कालांजलि कलोत्सव कलात्मक उत्कृष्टता का एक भव्य उत्सव होगा, जिसमें सौ से अधिक कलाकार भाग लेंगे। यह सांस्कृतिक संध्या भरतनाट्यम की गरिमा, भारतीय लोक परंपराओं की जीवंतता और शास्त्रीय संगीत की आध्यात्मिक गहराई का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगी। वर्षों के समर्पित प्रशिक्षण और कलात्मक साधना से परिपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से युवा कलाकार भारतीय सांस्कृतिक विरासत की कालातीत सुंदरता को मंच पर साकार करेंगे। भावपूर्ण अभिनय, जटिल लयबद्ध संरचनाएं, मनोहारी नृत्य विन्यास और प्रभावशाली संगीत रचनाएं दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराएंगी।
इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे, जिनकी उपस्थिति सांस्कृतिक संस्थाओं की समाज निर्माण और विरासत संरक्षण में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं पर्यटन सचिव डॉ. इलैयाराजा टी. (आईएएस) होंगे, जबकि भेल भोपाल के महाप्रबंधक श्री रूपेश तेलंग विशिष्ट अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। उनकी सहभागिता मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने में कालांजलि के योगदान को रेखांकित करती है।
कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण ‘रंगप्रवेशम’ होगा, जो किसी भी शास्त्रीय नर्तक की साधना यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। वर्षों के कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन, समर्पण और कलात्मक परिपक्वता का प्रतीक रंगप्रवेशम उन्नत विद्यार्थियों के औपचारिक मंच पदार्पण का अवसर होता है। इस वर्ष 27 समर्पित विद्यार्थी इस गौरवपूर्ण यात्रा का हिस्सा बनेंगे। इनमें अधिराज आचार्य, अद्विका प्रसाद, अंशिका मिश्रा, अंशिता साहू, अनुकृति पाठक, अनुष्का सक्सेना, अन्वेषा बडगुजर, दीक्षित्ता बेहरा, गौरी एच. नायर, गौरी आर. दास, जाह्नवी सिंह, कनिका पांडेय, कायला रितान्या, खुशहाली विश्वकर्मा, नव्या चौधरी, नेहा साहू, श्रीमती पार्वती निखिल, पूर्वाही कसदे, प्रतीक असुदानी, रौनक यादव, समृद्धि भट्ट, श्रेया सिंह परमार, स्नेहा यादव, स्वरांजली दीक्षित, उर्वी पनोरिया, वंशिका कनोजिया एवं वेदिका मिश्रा शामिल हैं। उनकी प्रस्तुतियां भारतीय शास्त्रीय परंपराओं की समकालीन समाज में निरंतर प्रासंगिकता का प्रभावशाली प्रमाण प्रस्तुत करेंगी।
कार्यक्रम की कलात्मक गरिमा को और ऊंचाई प्रदान करेगा देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिष्ठित संगीतज्ञों का जीवंत संगीत संयोजन। प्रस्तुति में प्रणव प्रदीप स्वर एवं नट्टुवांगम, पुणे के श्री पंचम उपाध्याय मृदंगम, मुंबई के श्री एस. आर. बालासुब्रमणियन वायलिन तथा पुणे के श्री संजय ससीधरन बांसुरी पर संगत देंगे। इसके अतिरिक्त पर्वतीश प्रदीप, प्रणव प्रदीप एवं उनकी टीम द्वारा विशेष संगीत प्रस्तुति भी दी जाएगी, जो संगीत और नृत्य के अद्भुत समन्वय को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए पर्दे के पीछे एक अनुभवी एवं समर्पित रचनात्मक टीम निरंतर कार्य कर रही है। कार्यक्रम की प्रस्तुतियों का परिचय एवं व्याख्या निधि सुरेश और वंशिका सोमानी द्वारा की जाएगी, जिससे दर्शक प्रत्येक प्रस्तुति के सांस्कृतिक एवं दार्शनिक आयामों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था की जिम्मेदारी भोपाल के एस. एस. क्रिएशन के अपूर्बा सरकार संभाल रहे हैं। लोकनृत्य संयोजन अजय एन. एवं नितिन सोनी द्वारा किया गया है, जबकि मेकअप की जिम्मेदारी श्रीमती सिनी प्रदीप, श्रीमती अनुपमा एम. कुमार एवं उनकी टीम निभा रही है। परिधानों की व्यवस्था कलालया ड्रेसेस एंड ज्वेलरीज द्वारा की गई है। कार्यक्रम का समन्वयन भावना शर्मा द्वारा महासचिव डॉ. अनु जॉनसन के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। संपूर्ण कार्यक्रम की कलात्मक परिकल्पना, नृत्य निर्देशन एवं कोरियोग्राफी गुरु श्री प्रदीप कृष्णन द्वारा की गई है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कालांजलि के संस्थापक एवं निदेशक गुरु श्री प्रदीप कृष्णन ने कहा, “पिछले सत्ताईस वर्षों से कालांजलि केवल एक संस्था नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की कालातीत सुंदरता को शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से संरक्षित करने की एक पवित्र यात्रा रही है। हमारा विश्वास है कि नृत्य और संगीत मात्र मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि वे अनुशासन, समर्पण और गहन सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण जीवन पद्धति हैं। मंच पर आने वाला प्रत्येक विद्यार्थी पीढ़ियों से चली आ रही एक अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाता है। 27वां कालांजलि कलोत्सव केवल प्रस्तुतियों का मंच नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, कलात्मक विकास, सांस्कृतिक गौरव और सामूहिक आकांक्षाओं का उत्सव है। हम भोपाल सहित सभी कला प्रेमियों, परिवारों और सांस्कृतिक उत्साहियों को इस अवसर पर आमंत्रित करते हैं कि वे इन युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन करें और भारतीय विरासत की इस अमर परंपरा का उत्सव मनाएं।”
कालांजलि की महासचिव डॉ. अनु जॉनसन ने संस्था के विद्यार्थियों, अभिभावकों, संरक्षकों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन ने कालांजलि की इस यात्रा को सशक्त बनाया है। उन्होंने कहा कि कलोत्सव सामूहिक समर्पण और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व का उत्सव है, जो युवा कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
कलात्मक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक सेवा के 27 वर्ष पूर्ण करने के अवसर पर कालांजलि भविष्य की पीढ़ियों के कलाकारों और संस्कृति संरक्षकों को तैयार करने के अपने संकल्प को पुनः दोहराता है। 27वां कालांजलि कलोत्सव लय, भाव, भक्ति और कलात्मक वैभव से परिपूर्ण एक अविस्मरणीय सांस्कृतिक संध्या सिद्ध होगा, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच एक सुंदर सेतु का निर्माण करेगा।
मीडिया प्रतिनिधियों, सांस्कृतिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, कला प्रेमियों तथा आम नागरिकों को 12 जून 2026 को हंसध्वनि सभागार, रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक उत्सव में सादर आमंत्रित किया जाता है।
कालांजलि के बारे में…
गुरु श्री प्रदीप कृष्णन द्वारा वर्ष 1998 में स्थापित कालांजलि भारतीय शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत के संरक्षण, संवर्धन और अभ्यास के लिए समर्पित मध्य भारत की अग्रणी सांस्कृतिक संस्थाओं में से एक है। भोपाल स्थित यह संस्था अब तक सैकड़ों विद्यार्थियों को प्रशिक्षित कर चुकी है और शिक्षा, मंचीय प्रस्तुतियों, मार्गदर्शन तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कलात्मक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के साथ कालांजलि भारतीय शास्त्रीय कलाओं की गौरवशाली परंपरा को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

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