June 13, 2026

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शेयर बाजार : F&O और कैश मार्केट में बड़े बदलाव की तैयारी! SEBI ने पेश किया नया रोडमैप

Stock Market : भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड सेबी (SEBI) कैश और डेरिवेटिव मार्केट (F&O) के स्ट्रक्चर को बदलने की तैयारी में है। मुंबई में आयोजित ईटी नाउ मार्केट्स समिट 2026 में सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बाजार को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा रोडमैप पेश किया है। मार्केट रेगुलेटरी सेबी चीफ के इस बयान के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में ट्रेडिंग के नियम और तौर-तरीके बदलने वाले हैं। नियामक का मानना है कि इन बदलावों से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी। इसके साथ ही छोटे और बड़े निवेशकों के लिए रिस्क मैनेजमेंट काफी आसान हो जाएगा।

क्या बदलने वाला है F&O ट्रेडिंग का तरीका?
SEBI चेयरमैन ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि उनका मेन फोकस इक्विटी सेगमेंट में लॉन्ग टर्म के फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने पर है। मौजूदा समय में ज्यादातर ट्रेडर्स शॉर्ट टर्म के कॉन्ट्रैक्ट्स में उलझे रहते हैं, जिससे मार्केट में रिस्क काफी बढ़ जाता है। लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट आने से मार्केट में स्थिरता आएगी और निवेशकों को अपनी पोजीशन को लंबे समय के लिए हेज करने का मौका मिलेगा। तुहिन कांत पांडेय के मुताबिक, इस कदम से बाजार में भागीदारी का दायरा बढ़ेगा। इसके साथ ही, निवेशकों की रिस्क मैनेजमेंट क्षमताओं को एक नई मजबूती मिलेगी।

शॉर्ट सेलिंग, SLB रिव्यू और RBI के साथ नया प्लान
मार्केट को और ज्यादा ट्रांसपैरेंट बनाने के लिए बाजार नियामक एक और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। चेयरमैन तुहिन कांत ने बताया कि सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग (SLB) और शॉर्ट सेलिंग के मौजूदा नियमों की व्यापक स्तर पर समीक्षा की जा रही है। इस समीक्षा का मुख्य मकसद कैश मार्केट और डेरिवेटिव मार्केट के बीच के तालमेल को और बेहतर बनाना है। जब ये दोनों मार्केट आपस में बेहतर तरीके से जुड़ेंगे, तो बाजार में शेयरों की खरीद-बिक्री में आसानी होगी। इसके अलावा, सेबी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर बॉन्ड मार्केट से जुड़े डेरिवेटिव प्रॉडक्ट्स लाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है, जिससे निवेशकों को निवेश के नए विकल्प मिलेंगे।

IGP नियमों में ढील की तैयारी
सेबी चेयरमैन ने कहा कि नियामक अपने इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (IGP) के नियमों की समीक्षा कर रहा है। इसका सीधा फायदा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, बायोटेक, डिफेंस और एडवांस्ड मटेरियल्स जैसे स्ट्रेटेजिक सेक्टर में काम करने वाले स्टार्टअप्स और कंपनियों को मिलेगा। नियमों में ढील मिलने से ये कंपनियां भारतीय शेयर बाजार से आसानी से लॉन्ग टर्म कैपिटल जुटा सकेंगी।

आसान होगी कंपनियों की डिलिस्टिंग
बता दें कि सेबी चीफ ने ऐलान किया है कि लिस्टिंग दायित्वों और प्रकटीकरण आवश्यकताओं (LODR) के फ्रेमवर्क की समीक्षा की जा रही है, जिससे इसे ग्लोबल लेवल स्टैंडर्ड के अनुरूप बनाया जा सके। इसके साथ ही, कंपनियों के डीलिस्टिंग के नियमों को भी सुधारा जाएगा। तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि विकसित पूंजी बाजार में निवेशकों के लिए फेयर एंट्री और फेयर एग्जिट दोनों का होना अनिवार्य है।

सलाह: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के आधीन है। निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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