मध्यम श्रेणी की आईटी कंपनी कोफोर्ज (Coforge) ने वर्ष 2030 तक अपनी आय को मौजूदा लगभग 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और कार्यकारी निदेशक सुधीर सिंह ने कहा कि इस लक्ष्य को बड़े ग्राहकों के साथ कारोबार बढ़ाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में किए गए निवेश का लाभ उठाते हुए रणनीतिक अधिग्रहणों के जरिये हासिल किया जाएगा।
यह लक्ष्य काफी महत्त्वाकांक्षी है। कंपनी ने केवल तीन वर्ष पहले ही 1 अरब डॉलर के राजस्व का आंकड़ा पार किया था। हालांकि, कोविड-19 महामारी के बाद से कंपनी ने तेज वृद्धि दर्ज की है। पिछले वित्त वर्ष में कोफोर्ज ने 1.8 अरब डॉलर का राजस्व हासिल किया है। उसे पिछले वर्ष एआई कंपनी एंकोरा के अधिग्रहण से अतिरिक्त 60 करोड़ डॉलर का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
कोफोर्ज करीब 1.8 अरब डॉलर के राजस्व के साथ फिलहाल देश की आईटी कंपनियों में सातवें स्थान पर है। यह कंपनी शीर्ष पांच आईटी कंपनियों और एलटीएम के बाद आती है। एलटीएम का राजस्व लगभग 4.8 अरब डॉलर है और उसने भी 2031 तक 10 अरब डॉलर के राजस्व का लक्ष्य रखा है। हालांकि छठे और सातवें स्थान की कंपनियों के बीच अभी बड़ा अंतर है लेकिन कोफोर्ज तेजी से आगे बढ़ने की योजना बना रही है।
सिंह ने कहा, ‘कंपनी का यह अनुमान पिछले कुछ वर्षों की स्वभाविक वृद्धि दर पर आधारित है और इसमें एआई से मिलने वाले संभावित अतिरिक्त लाभ को पूरी तरह शामिल नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि बाजार में चुनौतियों के बावजूद कंपनी की वृद्धि दर लगातार बढ़ी है।’
भारतीय आईटी सेवा कंपनियां इस समय धीमी राजस्व वृद्धि और मार्जिन पर दबाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इसकी वजह पारंपरिक कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, एआई के कारण पुराने कारोबार पर दबाव और एआई से होने वाली आय का अभी सीमित होना है। बावजूद, मध्यम श्रेणी की आईटी कंपनियां दो अंकों की मजबूत वृद्धि और विशेष सेवाओं के दम पर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि कोफोर्ज की सफलता का प्रमुख कारण कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में उसकी गहरी विशेषज्ञता है। इनमें बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं (बीएफएस), बीमा, यात्रा पर्यटन एवं आतिथ्य (टीटीएच) तथा सार्वजनिक क्षेत्र शामिल हैं। कंपनी की वृद्धि को मजबूत डोमेन-आधारित बाजार रणनीति, प्लेटफॉर्म और बौद्धिक संपदा (आईपी) आधारित समाधानों में शुरुआती निवेश तथा बड़े सौदे हासिल करने की आक्रामक रणनीति ने गति दी है।
सुधीर सिंह ने बताया कि कंपनी बड़े सौदों पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी वजह से 2 करोड़ डॉलर या उससे अधिक मूल्य वाले बड़े अनुबंधों की संख्या दो वर्ष पहले 11 थी, जो अब बढ़कर 21 हो गई है। इनमें अमेरिकी ट्रैवल टेक्नॉलजी कंपनी सेबर के साथ हुआ 1.5 अरब डॉलर का 10 वर्षीय समझौता अहम है।

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