June 17, 2026

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महाराष्ट्र में सियासी भूचाल : क्या टूट जाएगी उद्धव शिवसेना! शिंदे से मिले बागी सांसद, लोकसभा स्पीकार से भी मुलाकात

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. कूटनीतिक हलकों और सियासी गलियारों से जो खबरें आ रही हैं, वे उद्धव ठाकरे के लिए किसी तगड़े झटके से कम नहीं हैं. सूत्रों के हवाले से पुख्ता खबर है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलने की तैयारी कर ली है और वे डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को अपना समर्थन दे सकते हैं. कहा जा रहा है कि इन सांसदों ने बुधवार (17 जून) को एकनाथ शिंदे से मुलाकात भी की है.

इस संभावित बगावत की भनक लगते ही उद्धव गुट पूरी तरह एक्शन में आ गया है. पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने बागी रुख अपना रहे सांसदों को दो टूक चुनौती देते हुए कहा, “अगर किसी को भी जाना है, तो वह सबसे पहले अपनी सांसदी से इस्तीफा दे, क्योंकि वे उद्धव ठाकरे के नाम पर और पार्टी कार्यकर्ताओं की खून-पसीने की मेहनत की बदौलत चुनाव जीतकर आए हैं.”

प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखे केवल 3 सांसद!
दिलचस्प बात यह रही कि राउत की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद- अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे ही नजर आए, जिसने इन अटकलों को और हवा दे दी है. संजय राउत ने बेहद आक्रामक अंदाज में विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के सांसदों को तोड़ने के लिए 15-15 करोड़ रुपये का ऑफर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर इस तरह क्षेत्रीय पार्टियों को डरा-धमकाकर या खरीदकर तोड़ा जाएगा, तो फिर देश में चुनाव कराने का कोई मतलब ही नहीं रह जाएगा.

बागी सांसदों ने बढ़ा दिए अपने कदम!
इस बीच, बागी गुट ने अपने कदम आगे बढ़ा दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र सौंपा गया है, जिसमें शिवसेना के एक अलग गुट की मांग की गई है. इस पत्र पर 6 सांसदों के हस्ताक्षर होने की बात सामने आ रही है, जिसमें से पांच ने पहले ही साइन कर दिए थे और आखिरी सांसद के दस्तखत भी सुबह हो गए. पार्टी नेता अरविंद सावंत का कहना है कि वे हर स्थिति पर नजर रख रहे हैं और एहतियात के तौर पर व्हिप भी जारी किया गया है.

राउत और सावंत भी मिले स्पीकर से
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद बुधवार को अरविंद सावंत ने कहा, “मैंने स्पीकर से कहा कि अभी तक किसी ने यह नहीं कहा है कि वे पार्टी छोड़ रहे हैं. अगर कोई उनके पास आता है, तो संविधान का पालन किया जाना चाहिए. किसी अलग गुट को मान्यता नहीं मिल सकती, सिर्फ एक पार्टी का दूसरी पार्टी में विलय हो सकता है.” वहीं, संजय राउत ने कहा, “स्पीकर हमारे लिए सम्माननीय व्यक्ति हैं. हम उनका सम्मान करते हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले में कानून और नियमों का ध्यान रखा जाएगा.”

एकनाथ शिंदे की पार्टी ने कसा तंज
वहीं, संजय राउत के बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने पलटवार करते हुए कहा, “संजय राउत, जो कभी अपने सांसदों के बारे में सम्मान से बात करते थे, अब उन्हें अपशब्द कहने लगे हैं. यह उनकी पार्टी की लीडरशिप के पतन को दिखाता है. वे हिंदुत्व से दूर हो गए हैं, जिससे कार्यकर्ता, कैडर, विधायक और सांसद बहुत असंतुष्ट और बेचैन हैं. इसे समझने के बजाय, वे अपने ही लोगों पर दोष मढ़ते हैं और उनका अपमान करते हैं, ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जो सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है.”

बाकी विपक्षी दल भी रख रहे घटनाक्रम पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम पर बाकी विपक्षों दलों की भी नजर बनी हुई है. RJD नेता मनोज कुमार झा ने कहा, “मुझे हैरानी नहीं है. मुझे चिंता है, जैसे लाखों भारतीयों को है, क्योंकि ये सांसद एक विचारधारा और सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ वोट के आधार पर चुने गए थे. बीजेपी ने लोकतंत्र को खत्म कर दिया है. अब यह एक तय पैटर्न बन गया है. अगर आप राज्य-दर-राज्य देखें, तो चुनाव अब महत्वपूर्ण नहीं रहे. जब पीएम विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो वहां के लोग यहां की खबरें पढ़ते होंगे. वे क्या कहेंगे? भारत में कैसी शानदार राजनीतिक व्यवस्था है. चाहे आप हारें या जीतें, सांसद आपके पास आते हैं या लाए जाते हैं.”

शरद पवार की एनसीपी हुई अलर्ट!
शिवसेना (UBT) में मची इस खलबली, जिसे सियासी हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दिया जा रहा है, ने महाविकास अघाड़ी के बाकी सहयोगियों को भी डरा दिया है. सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार की एनसीपी इस घटनाक्रम के बाद पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है. पवार गुट को डर है कि शिवसेना के बाद अब उनके सांसदों को भी निशाना बनाया जा सकता है, जिसे ‘ऑपरेशन तुतारी’ कहा जा रहा है. शरद पवार खुद और पार्टी के सीनियर नेता अपने सभी सांसदों से लगातार फोन पर संपर्क साध रहे हैं और एकजुटता बनाए रखने के लिए अगले कुछ दिनों में एक बेहद अहम बैठक भी बुलाई जा सकती है. बहरहाल, महाराष्ट्र की राजनीति में अगले 24 घंटे बेहद नाटकीय होने वाले हैं.

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