अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज होने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल कम होने की संभावना नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने साफ किया है कि वैश्विक स्तर पर तेल सस्ता होने का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचने में अभी समय लगेगा। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतें केवल कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स, परिवहन लागत और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं। ऐसे में फिलहाल आम लोगों को पेट्रोल-डीजल के दामों में तत्काल राहत की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी क्यों नहीं घटेंगे दाम?
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय बाजार में तुरंत नहीं दिखेगा। उन्होंने कहा कि कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल भारत तक पहुंचने, उसे रिफाइन करने और फिर बाजार में उपलब्ध कराने में समय लगता है। इसके अलावा मौजूदा समय में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का दबाव बढ़ा हुआ है, जिससे सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में तेल कंपनियों को लागत और समय दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया संकट से तेल कंपनियों को हुआ बड़ा नुकसान
मंत्री ने बताया कि इस वर्ष पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। इससे तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को भारी वित्तीय दबाव झेलना पड़ा। सरकार ने उपभोक्ताओं को पूरी कीमत वृद्धि का बोझ न झेलना पड़े, इसके लिए कई स्तरों पर हस्तक्षेप किया। सुरेश गोपी के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में करीब 12 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार सरकार और तेल कंपनियों को उठाना पड़ा है। यही वजह है कि कीमतों में किसी भी बदलाव को लेकर सरकार जल्दबाजी में फैसला नहीं करना चाहती।
ईंधन की कीमतें सिर्फ क्रूड ऑयल से तय नहीं होतीं
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों से निर्धारित नहीं होतीं। इसमें परिवहन लागत, रिफाइनिंग खर्च, आयात लागत, टैक्स संरचना और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे कई कारक शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक दिन या सप्ताह में क्रूड ऑयल सस्ता होने से तुरंत खुदरा कीमतें घटाना व्यावहारिक नहीं होता। सरकार और तेल कंपनियां बाजार की स्थिति का लगातार आकलन कर रही हैं।
ब्रेंट और WTI क्रूड में दर्ज हुई गिरावट
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1.64 प्रतिशत गिरकर 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी लगभग 2 प्रतिशत टूटकर 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है और वैश्विक हालात सामान्य होते हैं, तो आने वाले समय में भारत में भी ईंधन कीमतों पर इसका सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
सरकार ने राज्यों की भूमिका पर भी उठाया सवाल
सुरेश गोपी ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा हुआ था, तब किसी भी राज्य सरकार ने अपने राजस्व में कटौती कर टैक्स कम नहीं किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को देश की अर्थव्यवस्था और तेल कंपनियों दोनों को संतुलित रखते हुए निर्णय लेने होते हैं। इसलिए केवल अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोल-डीजल के दामों में तत्काल कटौती करना संभव नहीं है।
फिलहाल राहत के लिए करना होगा इंतजार
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद आम उपभोक्ताओं को अभी कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार की स्थिरता, सप्लाई चेन की स्थिति और तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में फिलहाल पेट्रोल और डीजल की मौजूदा कीमतों में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है।

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