बिहार की राजधानी पटना का चर्चित कोचिंग विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है। ‘खान ग्लोबल स्टडीज’ के संचालक खान सर और ‘ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी’ के निदेशक रौशन आनंद के बीच हुए विवाद में पुलिस डायरी से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस जांच रिपोर्ट ने खान सर के आत्मरक्षा वाले दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह पूरी घटना 2 जून की रात की है। जांच में पाया गया कि दोनों गुटों के बीच मारपीट और तोड़फोड़ की घटना रात करीब 10:10 बजे हुई थी। इसके ठीक 20 मिनट बाद, यानी रात 10:30 बजे खान सर के दो बॉडीगार्ड्स प्रदीप और तालेबर सिंह ने गोलियां चलाईं। पुलिस का मानना है कि यदि फायरिंग आत्मरक्षा में की गई होती, तो वह मारपीट के दौरान होती। 20 मिनट के इस भारी समय अंतराल के कारण पुलिस ने निष्कर्ष निकाला है कि फायरिंग आत्मरक्षा के लिए नहीं, बल्कि इलाके में कथित तौर पर दहशत फैलाने के उद्देश्य से की गई थी।
सीसीटीवी फुटेज से खुला राज, केस में खान सर का भी नाम
शुरुआत में खान सर की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में उनके मैनेजर ने रौशन आनंद, उनके भाई प्रिंस, अभिषेक और गौरव को नामजद किया था, लेकिन उसमें फायरिंग का कोई जिक्र नहीं था। हालांकि, जब घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज सामने आए, तब खान सर के पक्ष ने फायरिंग की बात कबूली और इसे ‘सेल्फ डिफेंस’ बताया। अब पुलिस ने स्वतंत्र जांच के बाद खान सर और उनके दोनों बॉडीगार्डों के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है। खबरों के मुताबिक, दोनों सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस को दिए बयान में स्वीकार किया है कि उन्होंने खान सर के कहने पर ही गोलियां चलाई थीं।
भाई की मौत का लगा आरोप, मामले में नया ट्विस्ट
इस विवाद ने तब और हिंसक और संदेहास्पद रूप ले लिया जब ज्ञान बिंदु के संचालक रौशन आनंद ने अपने भाई प्रिंस यादव की नेपाल में हुई मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाए। रौशन आनंद ने कदमकुआं थाने में आवेदन देकर दावा किया है कि उनके भाई की नेपाल में एक साजिश के तहत हत्या कराई गई है, और इस साजिश के पीछे खान सर तथा कोल्ड स्टोरेज कारोबारी डॉ. आरएस प्रसाद का हाथ है। फिलहाल अदालत ने खान सर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा रखी है। कोर्ट ने पुलिस को 20 जून या उससे पहले केस डायरी पेश करने का आदेश दिया है, जिसके बाद दोनों बॉडीगार्ड्स की नियमित जमानत याचिका पर भी सुनवाई होनी है।

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