चंडीगढ़ प्रशासन के एस्टेट्स विभाग ने शहर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ (होम-स्टे) पॉलिसी को नए और सख्त प्रावधानों के साथ दोबारा नोटिफाई कर दिया है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी के बाद 27 जून 2026 को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके तहत अब शहर में 500 वर्ग गज (एक कनाल) या उससे बड़े स्वतंत्र मकानों में यह सुविधा शुरू की जा सकेगी।
क्या है ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ पॉलिसी?
बेड एंड ब्रेकफास्ट’ या होम-स्टे एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत मकान मालिक अपने घर के कुछ कमरों को पर्यटकों के ठहरने के लिए किराये पर दे सकते है। इसमें मेहमानों को रुकने के साथ-साथ सुबह का नाश्ता (ब्रेकफास्ट) भी उपलब्ध कराया जाता है। वर्ष 2009 में प्रशासन ने इस पॉलिसी को रद्द कर दिया था, लेकिन ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के विरोध और विभिन्न विभागों की राय के बाद इसे दोबारा लागू किया गया है। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य शहर में आने वाले पर्यटकों को घरेलू माहौल देना और खाली पड़े बड़े मकानों का सदुपयोग करना है।
दिल्ली अग्निकांड से लिया सबक, सुरक्षा नियम सख्त
हाल ही में दिल्ली में आग की घटना के कारण वहां यह पॉलिसी रद्द कर दी गई थी। इससे सबक लेते हुए चंडीगढ़ प्रशासन ने इसमें सुरक्षा के बेहद सख्त नियम जोड़े है। अब मकान में फायर फाइटिंग सिस्टम होना अनिवार्य कर दिया गया है और फायर डिपार्टमेंट से एनओसी (NOC) लेना भी जरूरी होगा।
कमरों की सीमा, रेंट और कैटेगरी
कमरों की सीमा : एक मकान में अधिकतम 8 कमरों को ही बीएंडबी (B&B) के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
किराया : रोज का रूम रेंट तय करने का अधिकार पूरी तरह मकान मालिक का होगा, प्रशासन की ओर से किराया फिक्स नहीं किया गया है।
रूम क्लासिफिकेशन (कैटेगरी) : लाइसेंस मिलने के बाद कमरों को दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। ‘गोल्ड कैटेगरी’ में कमरों का साइज 180 वर्ग फीट या इससे बड़ा होगा। ‘सिल्वर कैटेगरी’ में कमरों का साइज 120 से 180 स्क्वायर फीट तक होगा।
फूड लाइसेंस भी किया गया अनिवार्य
यदि मकान मालिक की ओर से गेस्ट को खाना सर्व करना है, तो उसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) से फूड लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। लाइसेंस मिलने के 30 दिनों के भीतर इसकी कॉपी प्रशासन के टूरिज्म डिपार्टमेंट को सौंपनी होगी।
आवेदन के लिए अन्य अनिवार्य शर्ते और नियम
मकान का साइज : सुविधा केवल 1 कनाल (500 वर्ग गज) या इससे बड़े इंडिपेंडेंट हाउसेस के लिए है। फ्लैट्स में इसकी अनुमति नहीं होगी।
नो स्ट्रक्चरल चेंज : मकान में किसी भी तरह का ढांचागत बदलाव करने की मंजूरी नहीं होगी।
ज्वाइंट ओनरशिप : यदि मकान ज्वाइंट ओनरशिप में है, तो सभी शेयरहोल्डर्स की लिखित सहमति और एनओसी (NOC) जरूरी है।
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट : आवेदन के समय मकान मालिक के पास एस्टेट ऑफिस का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट होना चाहिए। इसके बाद ही वह मकान को होम-स्टे के लिए रजिस्टर करा सकता है।
पार्किंग व्यवस्था : मकान के अंदर ही पर्याप्त पार्किंग होनी चाहिए। यदि अंदर जगह नहीं है, तो पास में इंतजाम होना जरूरी है।
केवल मालिक को अधिकार : इस पॉलिसी के लिए केवल मकान के मालिक ही आवेदन कर सकते है।

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