दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत ने पेट्रोल की कीमतों को काफी हद तक नियंत्रित रखा है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार का एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, भारत आज दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां आम लोगों को सबसे सस्ता पेट्रोल मिल रहा है.
भारत में मिल रहा है सस्ता पेट्रोल
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि जब दुनिया कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से परेशान है, तब भारत किसानों से खरीदे गए एथेनॉल की मदद से ईंधन लागत को काफी हद तक नियंत्रित रखने में सफल रहा है. एथेनॉल की कीमत पूरे साल तय रहती है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का इसका ज्यादा असर नहीं पड़ता है.
E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं है ?
अब कई लोगों का सोचना है कि अगर पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जा रहा है तो E20 पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं है? इस पर पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि सरकार किसानों को एथेनॉल का उचित मूल्य देती है. सरकार फिलहाल मक्का आधारित एथेनॉल करीब 71.86 रुपये प्रति लीटर खरीदती है. ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल होता है, तब E20 ईंधन बनाना सामान्य पेट्रोल से महंगा पड़ सकता है. हालांकि, अगर कच्चे तेल की कीमत 120-130 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाए तो एथेनॉल वाला ईंधन सस्ता साबित होने लगता है.
हरदीप पुरी ने बताया कि सरकार अब गन्ने और धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की जगह मक्का जैसी कम पानी वाली फसल से एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दे रही है. इससे दो फायदे हो रहे हैं. पहला किसानों की आय बढ़ रही है और दूसरा पानी की भी बचत हो रही है. वर्तमान में एथेनॉल उत्पादन में मक्का की हिस्सेदारी करीब 35 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.
पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग का उद्देश्य केवल पेट्रोल सस्ता करना नहीं है. इसका मुख्य मकसद कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और किसानों की आय में इजाफा करना है. मंत्रालय का दावा है कि इसी रणनीति की बदौलत पिछले चार वर्षों में वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद भारत में पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दुनिया के कई बड़े देशों और पड़ोसी देशों की तुलना में काफी कम रही है.

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