July 10, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

9 दिनों की बारिश से मिली राहत, लेकिन El Nino फिर बिगाड़ सकता है खेल

लगातार 9 दिनों तक औसत से अधिक बारिश के बाद जहां देशभर में मॉनसून को रफ्तार दी वहीं अब मौसम का मिजाज फिर बदलने वाला है। अनुमान है कि आने वाले दिनों में बारिश कमजोर पड़ सकती है। मौसम विशेषज्ञ इसे ‘एल नीनो रिवेंज’ का असर मान रहे हैं, जिससे हाल ही में बोई गई खरीफ़ फसलों और किसानों की चिंता एक बार फिर बढ़ सकती है।

हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह राहत लंबे समय तक नहीं रह सकती। अगले कुछ दिनों में बारिश की रफ्तार फिर धीमी पड़ने की संभावना है, जिससे किसानों की चिंता दोबारा बढ़ सकती है। दरअसल, जून में मॉनसून की शुरुआत के बाद कई हिस्सों में बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई थी। कई सप्ताह तक कम बारिश रहने से खेतों में नमी की कमी बनी रही और खरीफ फसलों की बुवाई भी प्रभावित हुई। लेकिन जुलाई की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी और मध्य भारत के ऊपर बने कम दबाव वाले मौसम तंत्र ने मॉनसून को दोबारा सक्रिय कर दिया। इसके बाद पश्चिम, मध्य और उत्तर भारत के कई राज्यों में लगातार अच्छी बारिश दर्ज की गई।

इस बारिश का सबसे बड़ा फायदा खेती को मिला। खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची, जलाशयों का जलस्तर बढ़ा और धान समेत दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई। कई इलाकों में किसान लंबे इंतजार के बाद बुवाई का काम पूरा कर सके। लगातार हुई बारिश से देशभर में मॉनसून की स्थिति भी सामान्य के करीब पहुंच गई।

हालांकि अब मौसम के संकेत बदलते दिखाई दे रहे हैं। अनुमान है कि 10 से 15 जुलाई के बीच उत्तर भारत, पश्चिम भारत, मध्य भारत और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां कमजोर हो सकती हैं। मौजूदा कम दबाव का सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है, जिसके कारण बादलों की संख्या में भी कमी आने लगी है। इसका असर आने वाले दिनों में बारिश पर साफ दिखाई दे सकता है।

यदि बारिश में यह कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो हाल ही में बोई गई खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसलों के शुरुआती विकास के लिए मिट्टी में लगातार नमी बनी रहना जरूरी होता है। अगर बुवाई के तुरंत बाद कई दिनों तक बारिश नहीं होती और सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध नहीं होती, तो छोटे पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।

मौसम वैज्ञानिक इस बदलते पैटर्न को El Nino से भी जोड़ रहे हैं। ऐसे वर्षों में मॉनसून आमतौर पर एक समान नहीं चलता। कभी कुछ दिनों तक बहुत तेज बारिश होती है, तो उसके बाद लंबे समय तक बारिश में कमी देखने को मिलती है। यही वजह है कि अच्छी बारिश के बावजूद पूरे सीजन में मौसम अस्थिर बना रहता है।

फिलहाल हालिया बारिश ने पानी की उपलब्धता और खेती की स्थिति में सुधार जरूर किया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी मॉनसून को पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा सकता। जुलाई के आखिर में फिर से बारिश का एक नया सक्रिय दौर आने की संभावना जताई जा रही है। तब तक किसानों और मौसम विभाग की नजर अगले कुछ दिनों के मौसम पर बनी रहेगी, क्योंकि यही समय तय करेगा कि मॉनसून लगातार मजबूत रहेगा या फिर यह केवल कुछ दिनों की राहत साबित होगी।

Spread the love