Udaan Desk. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स (High-powered task force) के गठन का ऐलान किया। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी (Nandan Nilekani) करेंगे। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वे अब जेल में हैं।
सरकार द्वारा गठित यह हाई-पावर्ड टास्क फोर्स राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए सुझाव देगी। इसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाना है।
इस समिति में पूर्व इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ, खुफिया अधिकारी तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अंकिता करवाल और प्रशासनिक अधिकारी अमृत लाल मीणा समेत कई विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों के इन विशेषज्ञों की मदद से परीक्षा व्यवस्था में दीर्घकालिक सुधारों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
क्या होगा टास्क फोर्स का फोकस?
- परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक और AI आधारित सुरक्षा उपाय लागू करना।
- NTA के ढांचे और कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार सुझाना।
- पेपर लीक और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए विशेषज्ञों की सिफारिशें तैयार करना।
- परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुरक्षित बनाना।
सरकार का यह फैसला प्रो. के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। इसी क्रम में NTA ने हाल ही में चार जनरल मैनेजर और 16 यंग प्रोफेशनल्स की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू की है, ताकि परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जाए।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब एक दिन पहले केंद्र सरकार ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सभी प्रमुख मांगें स्वीकार कर लीं। CJP ने कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किए थे। सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने समेत पार्टी की सभी मांगों को मंजूरी दे दी है।

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