Udaan Desk. अगर आप रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन लाखों रुपये की जरूरत, कम लिक्विडिटी और एक ही प्रॉपर्टी में पैसा फंसने के जोखिम की वजह से अब तक ऐसा नहीं कर पाए हैं, तो जल्द ही आपके लिए एक नया विकल्प आने वाला है। अब आप बिना सीधे प्रॉपर्टी खरीदे, म्युचुअल फंड के जरिए भी रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ में निवेश कर सकेंगे।
इसी जरूरत को देखते हुए, एडलवाइस म्युचुअल फंड भारत का पहला REITs-ओरिएंटेड इंडेक्स फंड लॉन्च करने जा रहा है। ‘Edelweiss Nifty REITs & Realty Index Fund’ नाम का यह फंड निवेशकों को एक ही म्युचुअल फंड के जरिए लिस्टेड रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश का अवसर देगा।
फंड की घोषणा करते हुए एडलवाइस म्युचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता ने कहा कि यह निवेशकों के लिए रियल एस्टेट में निवेश का आसान और सुविधाजनक विकल्प होगा। उनके मुताबिक, यह ढांचा ज्यादा पूंजी, कम लिक्विडिटी और किसी एक एसेट में निवेश से जुड़े जोखिम जैसी चुनौतियों को कम करने में मदद करेगा।
NFO कब खुलेगा, न्यूनतम निवेश कितना?
एडलवाइस निफ्टी रिट्स एंड रियल्टी इंडेक्स फंड का न्यू फंड ऑफर (NFO) 5 अगस्त से 19 अगस्त तक निवेश के लिए खुला रहेगा। फंड हाउस इस फंड को “स्काईलाइन से पोर्टफोलियो तक, भारतीय रियल एस्टेट में निवेश का नया तरीका” बता रहा है।
इस फंड को भरत लाहोटी और मानसी जलगांवकर मैनेज करेंगे। NFO में निवेश की न्यूनतम राशि 100 रुपये होगी और उसके बाद 1 रुपये के मल्टीपल में आगे निवेश किया जा सकेगा।
फंड कहां और कैसे करेगा निवेश?
यह एक ओपन-एंडेड पैसिव स्कीम है, जो Nifty REITs & Realty Index को ट्रैक करेगी। यह निवेशकों को एक ही इन्वेस्टमेंट के जरिए लिस्टेड रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और रियल्टी स्टॉक्स, दोनों में निवेश करने का मौका देती है।
Nifty REITs & Realty Index में अभी लिस्टेड REITs का हिस्सा लगभग 60 फीसदी और रियल एस्टेट कंपनियों का हिस्सा 40 फीसदी है। एडलवाइस म्युचुअल फंड का कहना है कि समय के साथ REITs का हिस्सा बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि और REITs लिस्ट होंगी और इंडेक्स में शामिल होने के लिए योग्य बनेंगी।
फंड का पोर्टफोलियो कैसा होगा?
फंड के पोर्टफोलियो में कुल 15 सिक्योरिटीज शामिल होंगी। इसमें कम से कम 60 फीसदी निवेश REITs में किया जाएगा, जबकि बाकी राशि शेयर बाजार में लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में निवेश की जाएगी।
जोखिम को सीमित रखने के लिए किसी एक सिक्योरिटी में अधिकतम 15 फीसदी तक ही निवेश किया जाएगा। इसके अलावा, एक ही प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में कुल निवेश पर भी तय सीमा लागू होगी, ताकि पोर्टफोलियो में बेहतर डाइवर्सिफिकेशन बना रहे।
रियल एस्टेट निवेश की बाधाएं होंगी कम
राधिका गुप्ता के अनुसार, रियल एस्टेट हमेशा से भारत में निवेश के लिए सबसे पसंदीदा एसेट क्लास में से एक रहा है। हालांकि, बड़ी पूंजी की जरूरत, कम लिक्विडिटी और एक ही प्रॉपर्टी में निवेश की वजह से होने वाले जोखिम के कारण कई निवेशक इस सेक्टर से दूर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नया इंडेक्स फंड इन चुनौतियों को दूर करने का प्रयास करेगा। इसके जरिए निवेशकों को म्युचुअल फंड के माध्यम से भारत के लिस्टेड रियल एस्टेट इकोसिस्टम में डाइवर्सिफाइड निवेश का अवसर मिलेगा।
टैक्स और कंपाउंडिंग का डबल फायदा
यह नया फंड निवेशकों को टैक्स के लिहाज से भी ज्यादा प्रभावी (टैक्स-एफिशिएंट) विकल्प देगा। राधिका गुप्ता के अनुसार, REITs से मिलने वाला वितरण (डिस्ट्रिब्यूशन) सीधे निवेशकों को देने के बजाय फंड के भीतर ही दोबारा निवेश होता रहेगा, जिससे उस पर तुरंत टैक्स नहीं लगेगा और लंबी अवधि में निवेशकों को बेहतर कंपाउंडिंग का लाभ मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि यह फंड निवेशकों को ऐसे एसेट क्लास में डाइवर्सिफाइड एक्सपोजर देगा, जिसमें पहले से ही संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी है और जो लंबे समय के अनुकूल ग्रोथ ट्रेंड से भी फायदा उठा रहे हैं।
यह लॉन्च क्यों है खास?
यह फंड ऐसे समय लॉन्च किया जा रहा है, जब भारत का लिस्टेड REIT बाजार लगातार मजबूत हो रहा है। देश के 6 लिस्टेड REITs के पास कुल मिलाकर करीब 3.1 लाख करोड़ रुपये मूल्य की ग्रेड-ए कमर्शियल रियल एस्टेट एसेट्स हैं। साथ ही, इन REITs ने 2019 से अब तक निवेशकों को 31,700 करोड़ रुपये से ज्यादा का वितरण (डिस्ट्रिब्यूशन) किया है।
इसके अलावा, 1 जनवरी 2026 से REITs को इक्विटी इंस्ट्रूमेंट का दर्जा दिया गया है। वहीं, 1 जुलाई 2026 से इन्हें इक्विटी इंडेक्स में भी शामिल कर लिया गया है। इससे संस्थागत और खुदरा (रिटेल) दोनों तरह के निवेशकों के बीच REITs की लोकप्रियता बढ़ी है।
भारत के REIT बाजार में अपार संभावनाएं
फंड हाउस के मुताबिक, भारत का REIT बाजार अभी विकसित देशों की तुलना में शुरुआती चरण में है। भारत में फिलहाल 6 लिस्टेड REITs हैं, जिनका अनुमानित मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 19 अरब डॉलर है। वहीं, अमेरिका में 196 लिस्टेड REITs हैं, जिनका कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत के REIT बाजार में आगे भी तेजी से विस्तार की काफी संभावनाएं हैं।
किन वजहों से बढ़ेगा रियल एस्टेट सेक्टर?
फंड हाउस का मानना है कि भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी के पीछे पांच बड़े कारण हैं। इनमें तेजी से बढ़ता शहरीकरण और लोगों की बढ़ती आय, इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की वजह से ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर का विस्तार तथा संस्थागत निवेश में बढ़ोतरी शामिल हैं।
नोट : यह समाचार सामान्य जानकारी के लिए है न की निवेश सलाह. शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के आधीन है. वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेकर ही निवेश करें.

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