August 6, 2026

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New Tax Bill : विदेशी निवेश से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े बदलाव शामिल

Udaan Desk. भारत में निवेश और कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने आज यानी 6 अगस्त को टैक्सेशन एंड अदर लॉज (संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी दे दी। सरकार का कहना है कि इस विधेयक का मकसद विदेशी निवेश को अट्रैक्ट करना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, टैक्स व्यवस्था में ज्यादा निश्चितता लाना और आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 की जगह लेना है। इस विधेयक के जरिए आयकर अधिनियम 2025, वित्त अधिनियम 2026 और पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 में संशोधन किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक, दुनिया भर में तेजी से बदल रहे जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम, ग्लोबल ट्रेड में आ रही रुकावटों और सप्लाई चेन में पैदा हुई चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ये संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।

बाहरी आर्थिक झटकों से निपटने में मिलेगी मदद
सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य बाहरी आर्थिक झटकों के असर को कम करना, वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित सेक्टर्स को सहारा देना और देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। इसके साथ ही कारोबार करना आसान बनाने यानी ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भी बेहतर किया जाएगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, इन प्रस्तावों का मकसद भारत को ग्लोबल कैपिटल, मैन्युफैक्चरिंग और कारोबार के लिए ज्यादा अट्रैक्टिव और भरोसेमंद गंतव्य बनाना है।

ऑफशोर इनवेस्टमेंट फंड के लिए टैक्स नियम होंगे आसान
विधेयक में एक महत्वपूर्ण बदलाव ऑफशोर इनवेस्टमेंट फंड और उनके फंड मैनेजर्स के लिए किया गया है। इसके तहत टैक्स से जुड़े नियमों और जरूरी औपचारिकताओं को आसान बनाया जाएगा। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का गलत इस्तेमाल और राउंड-ट्रिपिंग (विदेश के रास्ते फिर भारत में निवेश) रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा प्रावधान पहले की तरह लागू रहेंगे। सरकार का मानना है कि टैक्स नियम आसान होने से दुनिया की ज्यादा ग्लोबल फंड मैनेजमेंट कंपनियां भारत से अपना कारोबार चलाने के लिए प्रोत्साहित होंगी। इससे विदेशी निवेश बढ़ने की संभावना है।

FIIs और BIS को मिलेगी टैक्स छूट
विधेयक के तहत फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को गवर्नमेंट सिक्योरिटीज से होने वाली इंटरेस्ट इनकम और कैपिटल गेन पर टैक्स छूट दी जाएगी। हालांकि, इस छूट का फायदा लेने के लिए उन्हें सरकार की ओर से तय किए गए रिपोर्टिंग नियमों का पालन करना होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बड़ा सपोर्ट
सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। अब भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को मशीनरी, इक्विपमेंट और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों को मिलने वाली टैक्स छूट की अवधि 31 मार्च 2041 तक बढ़ा दी गई है। पहले यह टैक्स छूट 2030-31 तक ही लागू थी। सरकार ने इस योजना का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब इसमें लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, हियरएबल्स, वियरेबल्स और उनसे जुड़े एक्सेसरीज को भी शामिल किया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स स्टोर करने पर भी मिलेगा टैक्स फायदा
विधेयक के तहत उन विदेशी कंपनियों को 15 साल तक आयकर छूट मिलेगी, जो भारतीय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को सप्लाई करने के लिए कस्टम्स-बॉन्डेड वेयरहाउस में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स स्टोर करती हैं। सरकार का मानना है कि इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन और मजबूत होगी।

डायमंड कारोबार को मिलेगा फायदा
भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेड का बड़ा केंद्र बनाने के लिए सरकार ने एलिजिबल विदेशी डायमंड माइनिंग कंपनियों, साइटहोल्डर्स, ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और ऑक्शन संस्थाओं को मिलने वाली टैक्स छूट की अवधि भी 31 मार्च 2041 तक बढ़ा दी है। यह टैक्स छूट नोटिफाइड स्पेशल ज़ोन्स के जरिए रफ डायमंड की बिक्री से होने वाली आय पर लागू होगी।

REITs और InvITs से जुड़े नियमों में बदलाव
विधेयक में REITs और InvITs जैसे बिजनेस ट्रस्ट्स के लिए भी बदलाव किए गए हैं। इसके तहत उस पुराने नियम को हटा दिया गया है, जिसके कारण अगर स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) नए टैक्स सिस्टम को अपनाता था, तो यूनिट होल्डर्स को मिलने वाले डिविडेंड पर टैक्स छूट नहीं मिलती थी। इसके साथ ही, सरकार ने रेवेन्यू पर असर न पड़े, इसके लिए SPV स्तर पर संबंधित टैक्स लगाने का भी प्रावधान किया है।

डिजिटल पेमेंट्स से जुड़े नियम भी बदले
विधेयक के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में भी संशोधन किया गया है। केंद्र सरकार ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड्स को नोटिफाई कर सकेगी, जिन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स कोई चार्ज नहीं लगा सकेंगे। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट से जुड़े प्रावधानों में आयकर अधिनियम का संदर्भ हटाया गया है और नोटिफाई किए जा सकने वाले पेमेंट मोड्स का दायरा भी बढ़ाया गया है।

अध्यादेश की जगह अब लागू होगा नया कानून
यह विधेयक आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को रिप्लेस करेगा। हालांकि, इस अध्यादेश के तहत पहले से किए गए सभी फैसलों और कार्रवाई को वैध माना जाएगा।

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