- प्रधानमंत्री के ‘हर घर स्वच्छ जल’ अभियान के बीच सिवनी में पेयजल गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
सिवनी। सिवनी शहर में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर उठी शिकायत अब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर मध्य प्रदेश शासन के मंत्रालय तक पहुंच चुकी है। 3 जून 2026 को मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन के नाम से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत क्रमांक 38739455 दर्ज कराई गई थी। शिकायत में तिलक वार्ड एवं लडैया मोहल्ला क्षेत्र में निम्न गुणवत्ता के पेयजल की आपूर्ति को लेकर शिकायत करते हुए जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायतकर्ता द्वारा मामले को नागरिकों के स्वास्थ्य एवं स्वच्छ पेयजल से जुड़े जनहित के विषय के रूप में उठाया गया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘हर घर स्वच्छ जल’ की भावना एवं जल जीवन मिशन के अनुरूप नागरिकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई।

19 जून को जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला में हुई जांच
शिकायत के बाद जिला जल परीक्षण प्रयोगशाला, सिवनी द्वारा 19 जून 2026 को पानी के नमूने की जांच की गई। उपलब्ध जल परीक्षण रिपोर्ट में विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक मानकों की जांच दर्ज है।
रिपोर्ट में कुल कोलीफॉर्म एवं ई-कोलाई : 0 प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में नमूने का स्थान विजय नंदन, तिलक वार्ड, लडैया मोहल्ला, सिवनी अंकित है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित है कि नमूना प्रयोगशाला द्वारा स्वयं एकत्र किया गया था।
सूचना के अधिकार के तहत 18 बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी
जल परीक्षण के बाद शिकायतकर्ता विजय नंदन द्वारा 20 जून 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया। इसमें जल परीक्षण रिपोर्ट से संबंधित कुल 18 बिंदुओं पर सूचना एवं अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
इनमें नमूना प्राप्ति पंजिका, प्रयोगशाला पंजिका, नमूना लेने वाले अधिकारी का विवरण, नमूना लेने की तिथि एवं स्थान, निरीक्षण प्रतिवेदन, क्षेत्रीय टिप्पणियां, परीक्षण की कार्यप्रणाली, प्रयोगशाला की मानक प्रक्रिया, उपकरण एवं परीक्षण प्रक्रिया से संबंधित अभिलेख, जल टंकी की सफाई एवं क्लोरीनीकरण के अभिलेख, पूर्व जल परीक्षण रिपोर्ट, प्राप्त शिकायतों एवं उन पर की गई कार्रवाई तथा संबंधित विभागीय पत्राचार सहित अन्य जानकारी मांगी गई थी।
जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के मंत्रालय स्तर से हुआ संज्ञान
प्रकरण में मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग, मंत्रालय, भोपाल द्वारा 4 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर सूचना के अधिकार के आवेदन को संबंधित कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रेषित किया गया। इसके बाद मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, मंत्रालय, भोपाल द्वारा भी 13 जुलाई 2026 को पत्र जारी कर संबंधित कार्यालय को नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया। इस प्रकार पेयजल एवं जल परीक्षण से संबंधित मामला विभागीय मंत्रालयों के संज्ञान में भी पहुंचा।
7 अगस्त को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दिया जवाब
कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खंड, सिवनी द्वारा 7 अगस्त 2026 को सूचना के अधिकार आवेदन के संबंध में जवाब जारी किया गया। जवाब में विभाग ने बताया कि घरेलू नल कनेक्शन से पानी का नमूना जिला प्रयोगशाला के कर्मचारी द्वारा लिया गया तथा उसकी जांच कर जल परीक्षण रिपोर्ट तैयार की गई।
हालांकि शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा 18 अलग-अलग बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी में अनेक बिंदु विभागीय अभिलेखों एवं उपलब्ध दस्तावेजों से संबंधित थे। उनका कहना है कि प्रत्येक बिंदु पर स्पष्ट एवं अभिलेख आधारित जानकारी उपलब्ध कराया जाना आवश्यक था।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत को 69 दिन पूरे
3 जून 2026 से 11 अगस्त 2026 तक कुल 69 दिन व्यतीत हो चुके हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की उपलब्ध स्थिति के अनुसार शिकायत उच्च अधिकारियों के स्तर से होते हुए एल-4 स्तर तक पहुंची।
शिकायतकर्ता का कहना है कि पेयजल सीधे नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसके बावजूद शिकायत का पूर्ण एवं संतोषजनक निराकरण अभी अपेक्षित है। अब शिकायत को एल-5 अर्थात मुख्य सचिव स्तर पर उच्चस्तरीय समीक्षा के लिए उठाए जाने की मांग की जा रही है।
एक नमूने की जांच के साथ व्यापक जल गुणवत्ता परीक्षण की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि 19 जून की आधिकारिक जल परीक्षण रिपोर्ट में कुल कोलीफॉर्म एवं ई-कोलाई का परिणाम शून्य प्रति 100 मिलीलीटर दर्ज किया गया है। यह उस परीक्षण किए गए नमूने का आधिकारिक परिणाम है। लेकिन जनहित में यह प्रश्न भी महत्वपूर्ण है कि सार्वजनिक जलापूर्ति व्यवस्था की वर्तमान स्थिति सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोत, पानी की टंकी, वितरण व्यवस्था तथा उपभोक्ता स्तर से आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त नमूने लेकर नियमित जांच की जा रही है या नहीं। विशेषकर वर्षा ऋतु में जल स्रोतों और वितरण व्यवस्था में संभावित प्रदूषण की आशंका को देखते हुए जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी और आवश्यक निवारक कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब मुख्य सचिव स्तर पर उच्चस्तरीय कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता विजय नंदन ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय समीक्षा कराई जाए, आवश्यक स्थानों से जल के नमूने लेकर वर्तमान जल गुणवत्ता की जांच कराई जाए तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई एवं शेष बिंदुओं की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने यह भी मांग की है कि सूचना के अधिकार के आवेदन पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट एवं बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि पेयजल व्यवस्था से संबंधित वास्तविक स्थिति पूरी तरह सामने आ सके।
पेयजल नागरिकों के स्वास्थ्य से सीधे जुड़ा विषय है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शिकायत, जल परीक्षण रिपोर्ट, सूचना के अधिकार के आवेदन तथा मंत्रालय स्तर से हुए पत्राचार के बाद अब पूरे मामले में उच्चस्तरीय एवं पारदर्शी कार्रवाई पर नागरिकों की नजर बनी हुई है।

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