Udaan Desk. केंद्र सरकार ने पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ शुरू किया है। यह चार वर्षीय पहल पंचायतों को केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्थानीय परिसंपत्तियों से आय (Own Source Revenue-OSR) बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है। केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से इस कार्यक्रम की जानकारी दी।
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम क्या है?
यह एक राष्ट्रीय पहल है, जिसके तहत ग्राम पंचायतों और प्रखंड पंचायतों को अपनी अनुपयोगी या कम उपयोग वाली परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कर राजस्व अर्जित करने वाली परियोजनाएं विकसित करने में मदद दी जाती है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को दीर्घकालिक रूप से वित्तीय रूप से सक्षम बनाना है ताकि वे अपने विकास कार्यों के लिए केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर न रहें।
परियोजनाओं का चयन कैसे होगा?
- परियोजनाओं का चयन ‘ओपन चैलेंज सिस्टम’ के जरिए किया जाएगा।
- पहले वर्ष में 50 परियोजनाओं का चयन होगा।
- अगले तीन वर्षों में हर साल 100 परियोजनाएं चुनी जाएंगी।
- पूरी प्रक्रिया एक समर्पित डिजिटल पोर्टल के माध्यम से संचालित होगी।
- इससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
कौन-कौन सी पंचायतें पात्र हैं?
कार्यक्रम में भाग लेने के लिए पंचायतों को कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी।
- निर्वाचित ग्राम पंचायत हो।
- कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष शेष हो।
- स्वयं के राजस्व (OSR) की न्यूनतम सीमा 50 लाख रुपये हो।
- प्रखंड पंचायतों के लिए, निर्वाचित प्रखंड पंचायत हो।
- कार्यकाल कम से कम तीन वर्ष शेष हो।
- स्वयं के राजस्व (OSR) की न्यूनतम सीमा 1 करोड़ रुपये हो।
- उत्तर-पूर्वी और पर्वतीय राज्यों के लिए इन मानदंडों में कुछ छूट दी गई है।
पंचायतों को क्या सहायता मिलेगी?
सरकार पंचायतों को सीधे धन देने के बजाय तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगी। इसके तहत पंचायतों को:
- परियोजना अवधारणा विकसित करने में मदद मिलेगी।
- विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने में सहयोग मिलेगा।
- बैंक योग्य और टिकाऊ परियोजनाएं विकसित की जाएंगी।
- अनुरोध पत्र (RFP) और अनुबंध दस्तावेज तैयार करने में सहायता दी जाएगी।
- वित्तीय समापन (Financial Closure) में सहयोग मिलेगा।
ग्राम सभा की क्या भूमिका होगी?
कार्यक्रम में ग्राम सभा की मंजूरी अनिवार्य रखी गई है। इससे
- स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।
- परियोजनाएं स्थानीय जरूरतों के अनुरूप बनेंगी।
- पारदर्शिता और सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
नाबार्ड और हुडको की क्या भूमिका होगी?
राज्य सरकारें परियोजनाओं के तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के लिए राज्य स्तरीय समितियों में नाबार्ड (NABARD), हुडको (HUDCO) अन्य वित्तीय संस्थानों को शामिल कर सकती हैं। ये संस्थान परियोजनाओं की व्यवहार्यता और वित्तीय संरचना पर सलाह देंगे।
अभी तक कितने प्रस्ताव मिले?
4 अगस्त 2026 तक केंद्र स्तर पर संचालित पोर्टल पर 28 पंचायतों से 30 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
सोलहवें वित्त आयोग से क्या संबंध है?
सोलहवें वित्त आयोग ने सुझाव दिया है कि ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलने वाले प्रदर्शन आधारित अनुदान को उनके स्वयं के राजस्व (OSR) में वृद्धि से जोड़ा जाना चाहिए। आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पंचायतों को इसी दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है ताकि वे अपना राजस्व बढ़ा सकें, प्रदर्शन आधारित अनुदान पाने की पात्रता हासिल कर सकें, और धीरे-धीरे वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर संस्थाएं बन सकें।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्यक्रम?
भारत की अधिकांश पंचायतें अभी भी सरकारी अनुदानों पर निर्भर हैं। ऐसे में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पंचायतों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, स्थायी आय सृजन और वित्तीय स्वावलंबन की दिशा में एक नया मॉडल प्रदान करता है।
यदि यह पहल सफल होती है, तो पंचायतें केवल विकास योजनाओं को लागू करने वाली इकाइयां नहीं रहेंगी, बल्कि अपने संसाधनों से आय अर्जित करने वाली आर्थिक रूप से मजबूत स्थानीय संस्थाएं बन सकेंगी।

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