September 2, 2026

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समाजसेवा की मिसाल : सेवानिवृत्त डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज को दान की 80 करोड़ की संपत्ति, घर बनेगा वृद्धाश्रम

Udaan Desk. हिमाचल प्रदेश के 77 वर्षीय सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र कंवर ने समाजसेवा की मिसाल पेश करते हुए अपनी पूरी चल-अचल संपत्ति डॉ. राधाकृष्णन राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, हमीरपुर को दान कर दी है। दान की गई संपत्ति की अनुमानित कीमत 80 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

डॉ. कंवर ने वर्ष 2021 में ही अपनी संपत्ति सरकार को देने की वसीयत कर दी थी। अब उन्होंने बाकायदा गिफ्ट डीड के माध्यम से संपत्ति का हस्तांतरण पूरा कर दिया है। जमीन का म्यूटेशन भी 5 अगस्त को मेडिकल कॉलेज के नाम दर्ज हो गया।

33 साल तक स्वास्थ्य विभाग में दी सेवाएं
डॉ. राजेंद्र कंवर ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 33 वर्ष से अधिक समय तक सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद वह नादौन के निकट जोल सप्पड़ में चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं। खास बात यह है कि वह आज भी गरीब और जरूरतमंद मरीजों का नि:शुल्क इलाज करते हैं।

डॉ. कंवर के मुताबिक संपत्ति दान करने का फैसला उन्होंने अपनी पत्नी कृष्णा कंवर के साथ मिलकर कई वर्ष पहले लिया था। दंपति की कोई संतान नहीं है। दोनों ने तय किया कि जीवनभर की कमाई को समाज के कल्याण में लगाया जाए। कृष्णा कंवर शिक्षा विभाग में 32 वर्ष तक सेवाएं देने के बाद वर्ष 2011 में स्कूल प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।

दो मंजिला मकान और करोड़ों के आभूषण भी दान
दान की गई संपत्ति में करीब 2,112 वर्ग मीटर जमीन पर बना दो मंजिला मकान, करोड़ों रुपये मूल्य के आभूषण और अन्य चल संपत्तियां शामिल हैं। डॉ. कंवर ने प्रस्ताव दिया है कि उनके मकान को वृद्धाश्रम में तब्दील किया जाए। उन्होंने इसका नाम ‘कृष्णा-राजेंद्र ओल्ड एज होम’ रखने की इच्छा जताई है। डॉ. कंवर ने मेडिकल कॉलेज को अपने अंगदान का संकल्प भी लिया है। उन्होंने कहा, “जीवन की कमाई का सबसे अच्छा उपयोग तभी है, जब उससे जरूरतमंदों और बुजुर्गों के कष्ट कम किए जा सकें।”

मुख्यमंत्री ने बताया त्याग और जनसेवा की मिसाल
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने डॉ. राजेंद्र कंवर के इस योगदान के लिए उनका आभार जताया। मुख्यमंत्री ने उनके इस कदम को त्याग, मानवीय संवेदना और जनसेवा की अनुकरणीय मिसाल बताया।

डॉ. कंवर का यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब समाज में बुजुर्गों और जरूरतमंदों के लिए सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। अपनी जीवनभर की कमाई समाज को समर्पित करने का उनका निर्णय न केवल चिकित्सा क्षेत्र बल्कि आम लोगों के लिए भी प्रेरणा का संदेश है।

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