मध्य प्रदेश कैबिनेट ने रविवार को समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी) के विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी। इसे सोमवार से शुरू हो रहे विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश किया जाएगा।
कैबिनेट की बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार इस विधेयक को विधानसभा में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न अंग रही है और सरकार ने इसी भावना के अनुरूप यह कदम उठाया है।
यूसीसी पर मिले 9.58 लाख से ज्यादा सुझाव
मध्य प्रदेश ने समान नागरिक संहिता के प्रावधानों के निर्धारण के लिए सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। 27 अप्रैल 2026 को गठित इस समिति ने विभिन्न राज्यों के यूसीसी मॉडल, प्रचलित कानूनों और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन किया।
सुझाव लेने के लिए वेब पोर्टल बनाया गया, जिसे 22 मई 2026 को सार्वजनिक किया गया। पूरे प्रदेश में जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं। सरकार के अनुसार पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए, जबकि बैठकों के माध्यम से भी 1100 से अधिक सुझाव मिले।
93% से ज्यादा लोगों ने किया यूसीसी का समर्थन
सरकार का दावा है कि प्राप्त सुझावों में 93.54 प्रतिशत लोगों ने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया। वहीं 92.20 प्रतिशत लोगों ने सभी समुदायों में महिलाओं और पुरुषों के लिए समान कानून की वकालत की। 91.32 प्रतिशत लोगों ने भेदभावपूर्ण तलाक संबंधी प्रावधान समाप्त करने का समर्थन किया जबकि 92.66 प्रतिशत लोगों ने महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार दिए जाने की बात कही।
कुछ दिन पहले ही इंदौर में समान नागरिक संहिता की वकालत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर राम एक शादी करते हैं तो रहीम दो-तीन या चार शादी क्यों करें? उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएं भी हमारी बहनें हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में कानूनी रूप से रहने का हक उसी को होगा जिसने एक विवाह किया हो। संहिता के प्रावधानों में हर विवाह और लिव इन रिश्ते का पंजीयन कराना जरूरी करने की बात कही गई है।
इससे पहले देश के तीन अन्य राज्यों में यह कानून पारित हो चुका है। जनवरी 2025 में उत्तराखंड यूसीसी को लागू करने वाला पहला राज्य बना था। वहीं गुजरात और असम में यह पारित हो चुका है।

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