July 20, 2026

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बिहार में जमीन अधिग्रहण का बदलेगा नियम, अब मौजा के हिसाब से मिलेगा मुआवजा

पटना। बिहार में सरकारी कामों के लिए होने वाले जमीन अधिग्रहण को लेकर सरकार ने एक बड़ा फैसला किया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब जमीन मालिकों को सिर्फ सड़क या शहर से दूरी के आधार पर मुआवजा नहीं देगा, बल्कि मौजा को मुख्य आधार बनाएगा.

अब एक ही मौजा के अंदर आने वाली सभी जमीनों का मुआवजा रेट बिल्कुल एक समान होगा. विभाग बहुत जल्द इसका आधिकारिक लेटर जारी करने वाला है. इससे जमीन अधिग्रहण के काम में तेजी आएगी और किसानों की नाराजगी भी दूर होगी.

अब पास और दूर की जमीन का रेट होगा एक
अभी के नियम के मुताबिक, किसी सड़क या शहर के मुख्यालय से दूरी देखकर जमीन का मुआवजा तय होता है. इस नीति की वजह से एक ही मौजा में आसपास मौजूद जमीनों के दामों में बहुत बड़ा अंतर आ जाता था. एक किसान को ज्यादा पैसा मिलता था तो उसके ठीक बगल वाले को बहुत कम.

इस भेदभाव के कारण किसानों में भारी गुस्सा रहता था और वे एक समान रेट के लिए धरना-प्रदर्शन करने लगते थे. कई बार तो मामले कोर्ट चले जाते थे, जिससे सरकारी प्रोजेक्ट सालों-साल लटके रहते थे.

समय पर पूरे होंगे सरकारी प्रोजेक्ट
भू-अर्जन निदेशालय ने इस पूरी व्यवस्था को साफ-सुथरा और विवाद से दूर रखने के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है. अब दूरी तय करने के साथ ही संबंधित मौजा को ही सबसे बड़ा आधार माना जाएगा.

एक मौजा के भीतर जमीन कहीं भी हो, उसका मुआवजा रेट पूरी तरह बराबर रहेगा. इस फैसले से किसानों के बीच का भेदभाव खत्म होगा, जिससे अदालतों में मुकदमों का बोझ घटेगा और सरकारी योजनाएं बिना किसी रुकावट के समय पर पूरी हो सकेंगी.

45 हजार एकड़ जमीन का हो रहा अधिग्रहण
राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल बिहार में अलग-अलग विकास कार्यों के लिए 45 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. इस काम पर सरकार करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने वाली है.

सबसे ज्यादा जमीन उद्योग विभाग के लिए बिहार के 24 जिलों में ली जा रही है ताकि नए औद्योगिक क्षेत्र बन सकें. इस नए नियम से राष्ट्रीय राजमार्ग (NH), राज्य उच्चपथ (SH), रेलवे विस्तार, एयरपोर्ट, नदियों पर तटबंध, कोर्ट बिल्डिंग, अस्पताल और स्कूलों जैसी बड़ी बुनियादी परियोजनाओं को भारी रफ्तार मिलेगी.

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