June 11, 2026

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सरकार ने E22, E25 और E30 पेट्रोल पर हटाई एक्साइज़ ड्यूटी, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

नईदिल्ली. देश में कच्चे तेल पर निर्भरता कम कर एथेनॉल E22, E25, E27 और E30 को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को कम कर दिया है. इससे न सिर्फ तेल कंपनियों पर बढ़ रहा दबाव कम होगा, बल्कि एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों को भी लाभ मिलेगा.

केंद्र सरकार ने एथेनॉल ऑयल को बढ़ावा देने के लिए E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को कम कर दिया है. सरकार ने यह फैसला एथेनॉल 20 को बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक मिलाने के स्टैंडर्ड्स को मंजूदी दिये जाने के बाद लिया है. अब पेट्रोल पंप पर 30 प्रतिशत इथेनॉल मिक्स ​तेल मिल सकता है. सरकार ने यह कदम तेल आयात को कम करने के लिए उठाया है, लेकिन सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी कम करने का लाभ तेल भरवाने वाले आम लोगों को मिलेगा या नहीं, एक्साइज ड्यूटी क्या होती है और क्या है इसे हटाने का उद्देश्य…

क्या होती है एक्साइज ड्यूटी
एक्साइज ड्यूटी एक तरह से सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स है. यह टैक्स सरकार देश के अंदर प्रॉडक्शन होने वाली खास चीजों पर लगाती है. पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों पर भी यह टैक्स लागू होता है. अब सरकार ने E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल को इस टैक्स से राहत दे दी है. इसके पीछे की वजह सरकार का एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा देना है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता तो कम किया जा सके.

कच्चे तेल पर निर्भरता को करना है कम
E22, E25, E27 और E30 जैसे जैसे 22 से यह 30 बढ़ता है. इसका अर्थ है कि पेट्रोल में उतना ही प्रतिशत एथेनॉल मिक्स है. सरकार के इस तेल को अनुमति देने के पीछे की मंशा कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना है. इसकी एक वजह भारत का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल का इंपोर्ट करना है. इसी वजह से कच्चे तेल के दामों में थोड़ी भी बढ़ोतरी सीधे रूप से भारत में पेट्रोल डीजल के दामों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है. ऐसे में सरकार लंबे समय से बायोफ्यूल यानी जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की नीति पर काम कर रही थी. एथेनॉल ब्लेंडिंग उसी रणनीति का हिस्सा है.

आम आदमी को नहीं, इन लोगों को होगा फायदा
सरकार द्वारा एथेनॉल मिक्स तेल पर एक्साइज ड्यूटी हटाने का फायदा सीधे आम आदमी को नहीं मिलेगा. अभी यह लाभ तेल कंपनियों और एथेनॉल प्रॉडक्शन करने वाली कंपनियों को मिल सकता है. इसकी वजह पेट्रोल डीजल कंपनियों पर लगातार बढ़ रहा घाटे का बोझ कम हो सकता है. वहीं एथेनॉल की बढ़ती डिमांड और एक्साइज ड्यूटी में कटौती कंपनियों को लाभ पहुंचा सकती है.

पहले तैयारी हुई तकनीकी, अब टैक्स फ्री
सरकार के इस फैसले से पहले इंडियन स्टैंडर्ड्स बीआईएस ने E20 से आगे के एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों के लिए गुणवत्ता मानक तय किए थे. भारत के ‘द गज़ट ऑफ़ इंडिया’ के ताज़ा अंक में रेवेन्यू डिपार्टमेंट के तहत फ़ाइनेंस मिनिस्ट्री द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफ़िकेशन IS 19850:2026 मानक लागू किये गये हैं. इसमें E22, E25, E27 और E30 ईंधनों के लिए एथेनॉल की मात्रा, ऑक्टेन स्तर, सल्फर की सीमा, वाष्प दबाव, अशुद्धियों की सीमा, परीक्षण प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों को निर्धारित किया गया है. ये सभी मानक 15 मई 2026 से लागू हो गये हैं.

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