Report by Environmental Health News (EHN) : क्या आपने कभी सोचा है कि आजकल घरों में लगने वाली आग कुछ ही मिनटों में विकराल रूप क्यों ले लेती है? (Why do small fires in homes turn into big ones?) कई मामलों में आग की शुरुआत छोटी होती है, लेकिन देखते ही देखते पूरा फ्लैट या मकान उसकी चपेट में आ जाता है. इसके पीछे एक खास पेंट भी वजह बन रहा है.
- प्लास्टिक इमल्शन पेंट आग को तेजी से फैलाने में मदद कर सकता है.
- एक कमरे की आग पूरे फ्लैट तक पहुंच सकती है.
- प्लास्टिक और फोम सबसे बड़ा जोखिम बढ़ाते हैं.
एनवायरनमेंट हेल्थ न्यूज (EHN) की रिपोर्ट बताती है कि छोटी सी आग के बड़े हो जाने के पीछे सिर्फ शॉर्ट सर्किट या गैस लीकेज जिम्मेदार नहीं हैं, आधुनिक घरों में बढ़ते प्लास्टिक पेंट्स, फॉल्स सीलिंग, सिंथेटिक फर्नीचर, फोम, PVC और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी आग को पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से फैलाने का काम कर रहे हैं.
क्यों प्लास्टिक पेंट्स से आग तेजी से फैलती है?
प्लास्टिक आधारित पेंट्स और सिंथेटिक कोटिंग्स में ज्वलनशील रसायन होते हैं, जो आग लगने पर तेजी से गर्मी पैदा कर सकते हैं. इससे लपटों का फैलाव तेज हो जाता है. जलने के दौरान ये घना और जहरीला धुआं भी छोड़ते हैं, जिससे आग पर काबू पाना और लोगों का सुरक्षित बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है.
प्लास्टिक घरों में ‘फ्यूल’ की तरह क्यों काम करता है?
कुछ दशक पहले घरों में लकड़ी, कपास और प्राकृतिक सामग्री ज्यादा इस्तेमाल होती थी. आज स्थिति बदल चुकी है. सोफा, गद्दे, पर्दे, फर्नीचर, फ्लोरिंग, वायरिंग कवर, खिलौने और सजावटी सामान तक में प्लास्टिक और सिंथेटिक पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ गया है. फायर सेफ्टी रिसर्च बताती है कि कई प्रकार के प्लास्टिक लकड़ी की तुलना में अधिक तेजी से जलते हैं और ज्यादा गर्मी पैदा करते हैं. जलने पर ये जहरीली गैसें और घना धुआं भी छोड़ते हैं, जिससे लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है.
एक कमरे की आग पूरे फ्लैट में इतनी जल्दी कैसे फैलती है?
आग केवल लपटों से नहीं फैलती, बल्कि गर्मी और धुएं से भी फैलती है. आधुनिक घरों में ओपन लेआउट, फॉल्स सीलिंग, PVC पैनल, MDF बोर्ड, सिंथेटिक फर्नीचर और बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मौजूद होते हैं. जब इनमें आग लगती है तो तापमान तेजी से बढ़ता है और कुछ ही मिनटों में ‘फ्लैशओवर’ जैसी स्थिति बन सकती है, जिसमें लगभग पूरा कमरा एक साथ आग की चपेट में आ जाता है. इसके अलावा पिघलता हुआ प्लास्टिक नीचे गिरकर दूसरी चीजों में आग लगा सकता है, जिससे आग का फैलाव और तेज हो जाता है.
फ्लैट और अपार्टमेंट में खतरा ज्यादा क्यों होता है?
ऊंची इमारतों में आग लगने पर सबसे बड़ी समस्या धुआं बन जाता है. कई मामलों में लोग आग से नहीं, बल्कि धुएं में दम घुटने से जान गंवाते हैं. संकीर्ण गलियां, अवैध निर्माण, तारों का जाल, बंद एग्जिट, ग्रिल से ढकी बालकनियां और अवरुद्ध कॉरिडोर आग के दौरान बचाव कार्य को मुश्किल बना देते हैं. हाल के कई हादसों ने इन खतरों को उजागर किया है.
भारत में आग लगने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत में घरेलू आग की घटनाओं में शॉर्ट सर्किट और गैस लीकेज प्रमुख कारण बने हुए हैं. कई मामलों में ओवरलोडेड वायरिंग, खराब AC, पुराने बिजली कनेक्शन और सुरक्षा जांच की कमी भी हादसों का कारण बनती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जब ऐसी आग प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री तक पहुंचती है, तब उसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है.
अपने घर को आग का जाल बनने से कैसे बचाएं?
फायर सेफ्टी विशेषज्ञ कुछ बुनियादी सावधानियों पर जोर देते हैं:
- घर में स्मोक डिटेक्टर और फायर एक्सटिंग्विशर रखें.
- पुराने या क्षतिग्रस्त बिजली कनेक्शन की नियमित जांच कराएं.
- एक्सटेंशन बोर्ड पर जरूरत से ज्यादा लोड न डालें.
- कॉरिडोर, सीढ़ियां और एग्जिट रास्ते कभी ब्लॉक न करें.
- गैस पाइपलाइन और रेगुलेटर की समय-समय पर जांच कराएं.
- फ्लैट खरीदते समय फायर सेफ्टी सिस्टम और आपातकालीन निकास जरूर देखें.
- बच्चों की पहुंच से ज्वलनशील वस्तुएं दूर रखें.
वह बात जिस पर लोग सबसे कम ध्यान देते हैं
ज्यादातर लोग घर खरीदते समय लोकेशन, इंटीरियर और सुविधाएं देखते हैं, लेकिन फायर सेफ्टी को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि आग लगने के बाद सुरक्षा उपकरण नहीं, बल्कि पहले से की गई तैयारी जीवन बचाती है. आज के आधुनिक घरों में प्लास्टिक और सिंथेटिक सामग्री की बढ़ती मौजूदगी ने आग को पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक बना दिया है. इसलिए फायर सेफ्टी अब केवल बिल्डिंग नियमों का विषय नहीं, बल्कि हर परिवार की रोजमर्रा की सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है.
(स्रोत: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फायर सेफ्टी रिसर्च, फायर सेफ्टी विशेषज्ञों की रिपोर्ट, आवासीय भवन सुरक्षा अध्ययन, भारतीय शहरी अग्नि सुरक्षा विश्लेषण.)
साभार :DNAHINDI

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