September 2, 2026

Udaan Publicity

The Voice of Democracy

स्वतंत्रता दिवस 2026 : ‘विकसित भारत’ की और कदम… 79 सालों में यूं बदल गई भारत की टेक्नोलॉजी

उड़ान डेस्क। 15 अगस्त 2026 को भारत अपनी स्वतंत्रता का पर्व मना रहा है. 1947 में जब ब्रिटिश हुकूमत से देश आजाद हुआ था, तब गरीबी, भुखमरी और महज 12% साक्षरता दर के साथ देश का औद्योगिक और तकनीकी ढांचा लगभग शून्य के बराबर था. लेकिन पिछले 79 सालों में भारत ने एक ऐसा सफर तय किया है, जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है. 1947 के सुई और टेलीग्राम वाले दौर से निकलकर आज का आधुनिक भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा लहराने, वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शन करने और अपनी संप्रभु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Sovereign AI) बनाने वाला टेक सुपरपावर बन चुका है.

शून्य से शुरुआत : आईआईटी, परमाणु ऊर्जा और आईटी क्रांति की नींव
आजादी के तुरंत बाद भारत के सामने खाद्य संकट और आर्थिक चुनौतियां थीं, लेकिन तत्कालीन नेतृत्व ने समझा कि बिना मजबूत वैज्ञानिक नींव के असली संप्रभुता हासिल नहीं की जा सकती.

संस्थानों का निर्माण : डॉ. होमी जहांगीर भाभा (परमाणु ऊर्जा) और डॉ. शांति स्वरूप भटनागर (CSIR) जैसे दिग्गजों के मार्गदर्शन में रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया गया.

IIT की स्थापना : 1951 में आईआईटी खड़गपुर से शुरू हुए आईआईटी तंत्र ने देश को विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग टैलेंट दिया.

Y2K और IT सर्विस क्रांति : 1980 के दशक में सैम पित्रोदा के नेतृत्व में हुए टेलीकॉम सुधारों और 1991 के STPI (सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया) ने राह आसान की. सन् 2000 के Y2K संकट के दौरान भारतीय आईटी कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro) ने अपनी कोडिंग क्षमता का लोहा मनवाया, जिससे भारत दुनिया का “सॉफ्टवेयर लैब” बन गया.

इसरो और स्पेस सेक्टर में भारत का परचम
बैलगाड़ी और साइकिल पर रॉकेट के पुर्जे ढोने से लेकर दुनिया के प्रमुख स्पेस स्टेशन तक का इसरो (ISRO) का सफर ‘किफायती और सटीक’ (Frugal Innovation) तकनीक का सबसे बेहतरीन उदाहरण है.

मंगलयान (2013) : भारत पहली ही कोशिश में मंगल पर पहुंचने वाला पहला देश बना- वो भी महज $74 मिलियन (लगभग ₹450 करोड़) के बजट में, जो हॉलीवुड की फिल्म ‘इंटरस्टेलर’ से भी कम था.

चंद्रयान-3 (2023) : 23 अगस्त 2023 को भारत ने चंद्रमा के अनदेखे दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करके इतिहास रच दिया.

गगनयान और स्पेस स्टेशन : भारत अब अपने एस्ट्रोनॉट्स (गगनयात्री) को अंतरिक्ष में भेजने और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) स्थापित करने की तैयारी कर रहा है.

डिजिटल इंडिया और इंडिया स्टैक : दुनिया के लिए बना मिसाल
2015 में शुरू हुए डिजिटल इंडिया अभियान ने तकनीक को आम नागरिक का अधिकार बना दिया. ‘इंडिया स्टैक’ (India Stack) के जरिए भारत ने दुनिया को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की ताकत दिखाई:

आधार (Aadhaar) : 1.38 अरब से अधिक नागरिकों के पास सुरक्षित बायोमेट्रिक पहचान पत्र है.

यूपीआई (UPI) : दुनिया में रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का 46% से अधिक लेनदेन अकेले भारत में होता है. हर महीने 13 से 15 अरब ट्रांजैक्शन यूपीआई के जरिए हो रहे हैं.

डीबीटी (JAM ट्रिनिटी) : जनधन-आधार-मोबाइल लिंक से सरकार ने सीधे नागरिकों के खातों में $400 अरब से ज्यादा का ट्रांसफर कर बिचौलियों और घोटालों को खत्म कर दिया.

कोविन (CoWIN) : महामारी के समय 2.2 अरब से अधिक वैक्सीन खुराकों का सटीक डिजिटल प्रबंधन किया गया.

ग्लोबल लीडरशिप और AI-सेमीकंडक्टर की नई क्रांति
आज दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के दिग्गज कर रहे हैं- जैसे सुंदर पिचाई (Google), सत्या नडेला (Microsoft), और शांतनु नारायण (Adobe). 110 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है.

भविष्य के ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए देश अब आधुनिक तकनीकों में आत्मनिर्भर बन रहा है:

IndiaAI मिशन : स्वदेशी भाषा मॉडल (जैसे भारतजेन, कृत्रिम, सरवम AI) और 38,000 से अधिक GPU के साथ भारत ‘AI for All’ के विजन पर काम कर रहा है.

सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) : गुजरात और असम में ₹76,000 करोड़ के प्रोत्साहन से सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट्स बन रहे हैं.

नेशनल क्वांटम मिशन : क्वांटम कंप्यूटिंग और सुरक्षित संचार के क्षेत्र में भी देश तेजी से कदम बढ़ा रहा है.

Spread the love