अगर आपके पास इंडसइंड बैंक का क्रेडिट कार्ड है तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। बैंक सोमवार 15 जून 2026 से अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े कई नियमों में बदलाव करने जा रहा है। इन बदलावों का असर सीधे कार्ड इस्तेमाल करने वाले कस्टमर्स पर पड़ेगा। नए नियमों में फ्यूल ट्रांजैक्शन, ट्रांसपोर्टेशन खर्च, विदेशी मुद्रा में भुगतान और ब्याज की कैलकुलेशन जैसी कई अहम चीजें शामिल हैं। बैंक ने इन बदलावों की जानकारी अपनी वेबसाइट पर भी दी है।
बैंक क्यों बदल रहा है नियम?
बैंक की वेबसाइट पर जारी जानकारी के मुताबिक, इन बदलावों का मकसद फीस और चार्ज स्ट्रक्चर को अपडेट करना है। ऐसे में कस्टमर्स के लिए जरूरी है कि वे अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े नए नियमों को पहले ही समझ लें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी या अतिरिक्त खर्च का सामना न करना पड़े। चलिए जानते हैं 15 जून से कौन-कौन से नियम बदलने वाले हैं।
ट्रांसपोर्टेशन खर्च से जुड़ा नियम बदलेगा
इंडसइंड बैंक ट्रांसपोर्टेशन खर्च पर नया चार्ज लगाने जा रहा है। बैंक ने कहा है कि 15 जून के बाद अगर कोई कस्टमर्स एक स्टेटमेंट साइकल में ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े खर्चों पर 40,000 रुपये से ज्यादा खर्च करता है, तो उसे 1% अतिरिक्त चार्ज और उस पर लागू जीएसटी देना होगा। हालांकि, एयर ट्रैवल को इस नियम से बाहर रखा गया है। यानी फ्लाइट टिकट बुकिंग पर यह चार्ज लागू नहीं होगा।
फ्यूल ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में भी बदलाव
इंडसइंड बैंक ने फ्यूल ट्रांजैक्शन से जुड़े चार्ज में भी बदलाव किया है। अभी तक कई क्रेडिट कार्ड वेरिएंट्स पर 50,000 रुपये तक के फ्यूल खर्च की सीमा थी, लेकिन 15 जून से यह सीमा घटाकर 30,000 रुपये कर दी जाएगी। यानी एक स्टेटमेंट साइकल में 30,000 रुपये से ज्यादा का फ्यूल खर्च होने पर 1% चार्ज और जीएसटी देना पड़ सकता है। यह नियम कार्ड के वेरिएंट के अनुसार लागू होगा।
DCC चार्ज में भी बदलाव
इंडसइंड बैंक ने डायनैमिक करेंसी कन्वर्जन (DCC) चार्ज में भी बदलाव किया है। 15 जून से अलग-अलग क्रेडिट कार्ड वेरिएंट्स पर DCC चार्ज 1% + GST या 2% + GST तक हो सकता है। यह चार्ज तब लागू होता है जब विदेशी मुद्रा में किए गए ट्रांजैक्शन को भारतीय रुपये में कन्वर्ट किया जाता है। कस्टमर अपने कार्ड से जुड़े सटीक चार्ज बैंक की वेबसाइट पर देख सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड इंटरेस्ट रेट कैलकुलेशन में भी बदलाव
इंडसइंड बैंक ने क्रेडिट कार्ड पर इंटरेस्ट के कैलकुलेशन नियम में भी बदलाव किया है। यदि किसी कस्टमर ने पहले केवल आंशिक भुगतान किया था और बाद में मौजूदा महीने की ड्यू डेट तक पूरा बकाया चुका दिया, तब भी पिछले स्टेटमेंट के क्लोजिंग बैलेंस पर भुगतान की तारीख तक ब्याज लगता रहेगा।
यह ब्याज अगले महीने के स्टेटमेंट में जोड़ा जाएगा। साथ ही, Interest Free Period का फायदा तभी मिलेगा जब कस्टमर अगले स्टेटमेंट का पूरा भुगतान समय पर करेगा।

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