September 3, 2026

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NHAI का नया नियम : 20 किमी से लंबे और 500 करोड़ से ज्यादा के हाईवे प्रोजेक्ट में AI-MC होगा अनिवार्य

Udaan Desk. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 20 किलोमीटर से लंबे और 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाले सभी हाईवे प्रोजेक्ट में ऑटोमेटेड एंड इंटेलिजेंट मशीन-एडेड कंस्ट्रक्शन (स्वचालित और इंटेलिजेंट मशीन-सहायता प्राप्त निर्माण) को अनिवार्य कर दिया है। सरकार लंबे समय से हाईवे की क्वालिटी को लेकर उठने वाली चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है।

NHAI के सर्कुलर में क्या कहा गया?
NHAI के सर्कुलर के मुताबिक, ठेकेदारों को नई सड़क बनाते समय AI-MC सिस्टम का इस्तेमाल करना होगा। इस तकनीक को पूरे प्रोजेक्ट क्षेत्र में लगातार लागू करना जरूरी होगा। AI-MC तकनीक का इस्तेमाल हाईवे निर्माण की हर प्रमुख परत में करना होगा। इसमें एंबैंकमेंट, सबग्रेड और ग्रेन्युलर सब-बेस यानी GSB शामिल हैं। एंबैंकमेंट सड़क की ऊंची मिट्टी वाली नींव होती है। सबग्रेड उस मिट्टी की कॉम्पैक्ट की गई परत होती है, जिस पर सड़क की आगे की परतें बनाई जाती हैं। वहीं, GSB में क्रश्ड स्टोन, रेत और बजरी का इस्तेमाल होता है। इसे कॉम्पैक्ट की गई मिट्टी के ऊपर बिछाया जाता है और इसके बाद सड़क की ऊपरी सतह तैयार की जाती है।

कैसे काम करती है AI-MC तकनीक?
AI-MC एक ऐसी निर्माण तकनीक है, जिसमें भारी मशीनों पर कंप्यूटर और सेंसर लगाए जाते हैं। ग्रेडर, पेवर, कॉम्पैक्टर और डोजर जैसी मशीनों में इनका इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक का मकसद सड़क निर्माण की क्वालिटी, मजबूती और पारदर्शिता को बेहतर करना है। इससे मैनुअल निगरानी पर निर्भरता कम होगी और निर्माण के दौरान रियल टाइम में काम और क्वालिटी की जांच की जा सकेगी। इससे सड़क की हर परत को तय मानकों के मुताबिक और ज्यादा सटीक तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर हुआ था ट्रायल
AI-MC तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण के दौरान किया गया था। हालांकि, उस समय इसका इस्तेमाल पूरे प्रोजेक्ट में नहीं हुआ था। इसके अलावा निर्माण की हर परत पर भी इस तकनीक को लागू नहीं किया गया था। अब NHAI के नए नियम का उद्देश्य इसी कमी को दूर करना है।

NHAI को ठेकेदारों से रियल टाइम डेटा क्यों चाहिए?
अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम का मकसद निर्माण के दौरान होने वाली मानवीय गलतियों को कम करना है। इसके साथ ही सड़क निर्माण के लिए एक समान मानक सुनिश्चित करना भी इसका उद्देश्य है। AI-MC के जरिए मिट्टी का काम शुरू होने से लेकर सड़क की सतह बिछाने तक हर चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।

एक अधिकारी ने कहा कि नए नियमों के तहत ठेकेदारों को रियल टाइम डेटा NHAI अधिकारियों के साथ साझा करना होगा। इससे ठेकेदार और NHAI दोनों को फायदा होगा। अधिकारी के मुताबिक, जब ठेकेदार के पास रियल टाइम डेटा उपलब्ध होगा तो सब-कॉन्ट्रैक्टर के लिए निर्माण में मानकों से समझौता करना काफी मुश्किल हो जाएगा।

इंडस्ट्री ने कहा, इसे टुकड़ों में लागू न करें
AI-MC से जुड़े कुछ उद्योग प्रतिनिधियों के मुताबिक, ठेकेदार अब तक NHAI और दूसरी हाईवे निर्माण एजेंसियों के साथ रियल टाइम डेटा साझा करने को लेकर हिचकिचाते रहे हैं। इसकी वजह यह है कि रियल टाइम डेटा साझा करने से निर्माण कार्य के लिए उनकी सीधी जवाबदेही तय हो जाती है।

एक उद्योग प्रतिनिधि ने कहा कि जब तक NHAI और दूसरी एजेंसियों को रियल टाइम डेटा नहीं मिलेगा, तब तक इस तकनीक का असर बहुत सीमित रहेगा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार हाईवे निर्माण व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर है तो AI-MC को अलग-अलग हिस्सों में नहीं, बल्कि पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए।

हाईवे निर्माण में बढ़ेगी जवाबदेही
नए नियम लागू होने के बाद बड़े हाईवे प्रोजेक्ट में मैनुअल निगरानी की जगह लगातार सेंसर आधारित क्वालिटी जांच पर जोर दिया जाएगा। NHAI को उम्मीद है कि इससे निर्माण में होने वाली लापरवाही और मानकों से समझौते के मामलों को कम किया जा सकेगा। साथ ही हाईवे निर्माण से जुड़े ठेकेदारों और दूसरी एजेंसियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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