केंद्र सरकार ने कैंसर की आवश्यक दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इससे प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाओं पर इसका असर ज्यादा पड़ेगा। इस फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर कैंसर रोगियों के इलाज के खर्च को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
देश में कैंसर इलाज व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने कीमोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की कीमत बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) जैसी जीवनरक्षक दवाओं की भारी कमी देशभर के अस्पतालों और कैंसर केंद्रों में महसूस की जा रही है। सरकार का मानना है कि कीमतों में संशोधन से दवा निर्माताओं को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और बाजार में आपूर्ति सुधर सकेगी।
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल्स ने 7 जून को नेशनल फार्मास्यूटिकल्स प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के मेंबर सेक्रेटरी को एक पत्र लिखा था। इसमें कहा गया, “माननीय मंत्री (रसायन और उर्वरक) ने इन दवाओं के लिए DPCO, 2013 के पैरा 19 का इस्तेमाल करने की सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी है।
कीमतों में बदलाव को पैरा 19 के तहत मंज़ूरी दी गई थी। यह एक खास प्रावधान है जो सरकार को सामान्य कीमत-नियंत्रण व्यवस्था से हटकर दखल देने की इजाज़त देता है, जब उसे लगता है कि जरूरी दवाओं की उपलब्धता या उन्हें किफायती बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।
क्यों पैदा हुआ कैंसर की दवाओं का संकट?
पिछले कुछ महीनों से देशभर में सिस्प्लैटिन (Cisplatin) और कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) की उपलब्धता लगातार घट रही है। ये दोनों प्लैटिनम आधारित कीमोथेरेपी दवाएं हैं और फेफड़े, सर्वाइकल, ओवेरियन, सिर एवं गर्दन, ब्लैडर तथा कई अन्य प्रकार के कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं का विकल्प सीमित है और कई मामलों में ये इलाज का सबसे प्रभावी हिस्सा होती हैं।

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