September 2, 2026

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सेबी की नई तैयारी से निवेश होगा आसान, म्यूचुअल फंड्स की तरह खरीद सकेंगे बॉन्ड्स

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की योजना परवान चढ़ी तो बॉन्ड मार्केट में भी निवेश करना म्यूचुअल फंड (MF) में निवेश करने जैसा ही आसान हो जाएगा। सेबी ने खुदरा निवेशकों तक बॉन्ड मार्केट की पहुंच आसान बनाने का खाका तैयार कर दिया है।

बाजार नियामक की ओर से जारी प्रस्ताव में ‘फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स’ (FICPs) नाम से एक असिस्टेड-डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बनाने की अवधारणा पेश की गई है। यह मॉडल काफी हद तक म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर (MFD) मॉडल पर आधारित है, जिसने टीयर 2 और टीयर 3 के छोटे शहरों में वित्तीय उत्पादों की पैठ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आइए सेबी के इस प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं पर गौर करते हैं।

FICP क्या है, यह क्या करेगा?
FICP कोई भी व्यक्तिगत (Individual) या गैर-व्यक्तिगत (Non-individual) संस्था हो सकती है जो स्टॉक एक्सचेंज के साथ सूचीबद्ध होगी। ये पार्टनर्स जमीनी स्तर पर निवेशकों को फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटीज के फीचर्स और उनके जोखिमों को समझाने, उन्हें ऑनबोर्ड करने, केवाईसी (KYC) तथा दस्तावेज पूरे करने में मदद करेंगे। साथ ही, ये ऑनलाइन बोर्ड प्लैटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) के माध्यम से लेनदेन की सुविधा प्रदान करेंगे।

ओबीपीपी क्या हैं?
ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) ऐसी डिजिटल संस्थाएं हैं जो ऑनलाइन प्लैटफॉर्म संचालित करती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य तकनीक के माध्यम से डेट सिक्यॉरिटीज या बॉन्ड्स को आम निवेशकों, विशेषकर खुदरा निवेशकों के लिए अधिक सुलभ, पारदर्शी और लेनदेन में आसान बनाना है। ये ऑबीपीपीज नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में रजिस्टर्ड होते हैं। अभी एनएसई में 39 जबकि बीएसई में 37 ओबीपीपीज रजिस्टर्ड हैं।

OBPPs के जरिए किन प्रॉडक्ट्स में निवेश कर पाएंगे आप?
आप ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर पर आसान और सुरक्षित तरीकों से कई तरह के बॉन्ड्स में निवेश कर सकते हैं। इस प्लेटफॉर्म पर आपको कॉरपोरेट बॉन्ड्स (जैसे लिस्टेड डेट और सिक्योरिटाइज्ड डेट इंस्ट्रूमेंट्स) के साथ-साथ आने वाले नए बॉन्ड इश्यू (IPO) में भी पैसा लगाने का मौका मिलता है।

इसके अलावा, जी-सेक (G-Secs) जैसी सरकारी प्रतिभूतियां, राज्यों के विकास ऋण (SDLs), ट्रेजरी बिल (T-Bills) और सरकारी सोने से जुड़े सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) भी यहां आसानी से उपलब्ध होते हैं। अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो धारा 54EC वाले विशेष टैक्स-सेविंग बॉन्ड्स का विकल्प भी मौजूद है। साथ ही, सेबी या आरबीआई जैसे मुख्य वित्तीय नियामकों से स्वीकृत अन्य निवेश उत्पाद भी आपको एक अलग टैब के जरिए इसी प्लैटफॉर्म पर मिल जाते हैं।

निवेशकों को झूठे सपने दिखाने पर रोक
रिटेल निवेशकों के हितों की सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव के लिए सेबी ने सख्त नियम प्रस्तावित किए हैं। इसके तहत, एफआईसीपी को ग्राहक के फंड या सिक्योरिटीज को संभालने की बिल्कुल अनुमति नहीं होगी। वे अपने नाम या खाते में ग्राहकों से कोई पैसा या सिक्योरिटीज स्वीकार नहीं कर सकते।

दूसरा, एफआईसीपी ग्राहकों को कोई डील स्लिप, कॉन्ट्रैक्ट नोट या इनवॉइस जारी नहीं करेंगे। ये सभी दस्तावेज सीधे ओबीपीपी से जारी किए जाएंगे। एफआईसीपी को अपने प्लैटफॉर्म के माध्यम से AT1 बॉन्ड जैसे इनसिक्यॉर्ड परपेचुअल डेट इंस्ट्रूमेंट्स के डिस्ट्रीब्यूशन में शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।

ओबीपीपीज को क्रेडिट बॉन्ड्स में निहित क्रेडिट जोखिम को कलर कोडेड विजुअलाइजेशन के जरिए रिस्क-ओ-मीटर अपने वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। वो अपने विज्ञापनों में ‘गारंटीड रिटर्न’ जैसी भ्रामक शब्दावली का उपयोग नहीं कर सकते।

उन्हें ‘गारंटीड इनकम’ या ‘प्रेडिक्टेबल रिटर्न्स’ जैसे शब्दों के साथ आवश्यक डिस्क्लोजर्स और चेतावनी जारी करनी होती है। इनके अलावा, ओबीपीपीज यदि दूरदराज के क्षेत्रों में पहुंच बढ़ाने के लिए एफआईसीपीज की नियुक्ति करते हैं, तो वे उन पार्टनर्स के सभी कृत्यों, भूलों या चूकों के लिए कानूनी रूप से पूरी तरह उत्तरदायी होंगे।

ओबीपीपीज के जरिए निवेश पर कितनी फीस?
सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि एफआईसीपी ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क या राशि नहीं वसूल सकते। उन्हें उनकी सेवाओं के लिए भुगतान केवल संबंधित ओबीपीपी से कमीशन शेयरिंग के माध्यम से किया जाएगा। वहीं, ग्राहकों से लिया जाने वाला कुल कमीशन/फीस/ब्रोकरेज निवेश मूल्य के अधिकतम 2.5% पर सीमित होगा।

खुदरा निवेशकों के बीच छा रहे बॉन्ड्स
ध्यान रहे कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) के रजिस्टर्ड ग्राहकों की संख्या लगभग 6 लाख से बढ़कर 15 लाख हो गई है। इस दौरान इन प्लैटफॉर्म्स के माध्यम से होने वाला वार्षिक लेनदेन मूल्य लगभग 71 अरब रुपये से बढ़कर 260 अरब रुपये पर पहुंच गया है, जो तकनीक की मदद से खुदरा निवेशकों के बीच बढ़ती पैठ को दर्शाता है।

अगर ट्रेडिंग की बात करें तो वित्त वर्ष 2024-25 में रिक्वेस्ट फॉर कोट (RFQ) प्लैटफॉर्म पर जहां 2.76 लाख ट्रेड हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या लगभग 546% की भारी वृद्धि के साथ 17.84 लाख हो गई।

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