अमेरिका ने सूडान में गृहयुद्ध को कथित तौर पर बढ़ावा देने के आरोप में एक भारतीय नागरिक और भारतीय विस्फोटक निर्माता कंपनी सहित आठ व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के ‘विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय’ (OFAC) ने बताया कि इस प्रतिबंधित नेटवर्क ने सूडान सशस्त्र बल (SAF) और अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) को घातक सामग्री पहुंचाकर अफ्रीकी देश में जारी गृहयुद्ध को और भीषण बनाने में मदद की। ओएफएसी ने पोर्ट सूडान स्थित सरकारी सिविल इंजीनियरिंग निर्माण कंपनी ‘पोर्ट्स इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड’ को भी प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है।
रायपुर की कंपनी और सीईओ निशाने पर
प्रतिबंधित किए गए लोगों में छत्तीसगढ़ के रायपुर के रहने वाले आलोक चौधरी शामिल हैं, जो ‘एसबीएल एनर्जी लिमिटेड’ (SBL Energy Limited) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) हैं। इस कंपनी को ‘अमीन एक्सप्लोसिव प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से भी जाना जाता है।
यह हैं आरोप
वित्त मंत्रालय के अनुसार, रायपुर स्थित एसबीएल एनर्जी ने सूडान की ‘टारगेट मल्टीएक्टिविटीज कंपनी’ (TMAC) को विस्फोटकों और संबंधित सामग्रियों की 200 से अधिक खेप की आपूर्ति की। बाद में इन विस्फोटकों का इस्तेमाल सूडान सशस्त्र बल (SAF) द्वारा बम हमलों में किया गया। वित्त मंत्रालय ने एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के साथ-साथ सूडान और मिस्र में सक्रिय कई अन्य कंपनियों पर भी वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने एक बयान में कहा कि ये नेटवर्क सूडान सशस्त्र बल (SAF) और ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) को हथियार, विस्फोटक और विदेशी लड़ाके उपलब्ध करा रहे हैं। इनके इसी समर्थन ने संघर्ष को लंबा खींच दिया है, जिससे दुनिया का सबसे भीषण मानवीय संकट पैदा हुआ है और आतंकवादी समूहों को फलने-फूलने का मौका मिला है।

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