सोने से जुड़ी निवेश योजनाओं में निवेशकों की लगातार बढ़ती रुचि के बीच इनवेस्को म्युचुअल फंड ने अपने गोल्ड फंड में निवेश पर कुछ समय के लिए रोक लगा दी है। इसके साथ ही कंपनी उन फंड कंपनियों की फेहरिस्त में पहुंच गई है, जिन्होंने हाल के महीनों में सोने से जुड़ी योजनाओं में निवेश पर अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए हैं।
कंपनी ने कहा कि फिलहाल उसके गोल्ड ईटीएफ (इनवेस्को इंडिया गोल्ड ईटीएफ) में 25 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का एकमुश्त निवेश स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही इनवेस्को इंडिया गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड में नई खरीद और स्विच-इन लेनदेन पर भी सीमा तय की गई है। 16 जून से निवेशक हरेक पैन पर 10 लाख रुपये महीने से ज्यादा एकमुश्त निवेश इसमें नहीं कर सकते।
इनवेस्को की तरह कई अन्य फंड कंपनियों ने भी अपने गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड फंड में निवेश पर इसी तरह की पाबंदियां लगाई हैं। इनमें एसबीआई म्युचुअल फंड, ऐक्सिस म्युचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्युचुअल फंड, टाटा म्युचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड और एचडीएफसी म्युचुअल फंड शामिल हैं।
क्यों लग रही रोक?
अधिकांश फंड कंपनियां मौजूदा बाजार और आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए बंदिश लगाने की बात कह रही हैं। हालांकि ऐसे कदम आम तौर पर तभी उठाए जाते हैं, जब किसी योजना में निवेश बहुत बढ़ जाता है। तब बढ़ती मांग के बीच परिचालन और पोर्टफोलियो प्रबंधन सुचारु रखने के लिए एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (एएमसी) बंदिशें लगा देती हैं। निप्पॉन इंडिया म्युचुअल फंड में कमोडिटीज हेड और फंड मैनेजर विक्रम धवन कहते हैं, ‘इस उपाय का मकसद सोने में आने वाले बड़े निवेश को नियंत्रित करना है।’
मांग नहीं आपूर्ति है दिक्कत?
गोल्ड ईटीएफ पूरी तरह धातु यानी फिजिकल सोने पर चलते हैं। जब भी इन योजनाओं में नया निवेश आता है तो फंड कंपनी को नई ईटीएफ यूनिट बनाने के लिए नया सोना खरीदना पड़ता है।
म्युचुअल फंडों की संस्था एम्फी में पंजीकृत म्युचुअल फंड वितरक बीपीएन फिनकैप के निदेशक एके निगम कहते हैं, ‘गोल्ड ईटीएफ में नए निवेश पर अस्थायी रोक मांग या प्रदर्शन की वजह से नहीं बल्कि आपूर्ति में आ रही बाधा के कारण लगाई गई है। एसेट मैनेजमेंट कंपनियां फिजिकल सोने की उपलब्धता और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा तय 25 फीसदी सीमा के दायरे में काम करती हैं।’
उन्होंने उम्मीद जताई कि जैसे ही भारतीय रिजर्व बैंक आयात कोटे को सामान्य करेगा और सोना आसानी से उपलब्ध होगा, फंड कंपनियां नए निवेश की अनुमति दे देंगी।
निवेशकों पर बंदिश का असर?
बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि गोल्ड ईटीएफ में नए निवेश पर लगी अस्थायी रोक का खुदरा निवेशकों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा। धवन कहते हैं, ‘जिनका निवेश पहले से है, वे गोल्ड ईटीएफ यूनिट की खरीद, बिक्री करना और उन्हें होल्ड करना जारी रख सकते हैं।’
धवन की राय से इत्तफाक जताते हुए निगम कहते हैं कि निवेशक प्रतिबंध के दौरान भी एक्सचेंज के जरिये गोल्ड ईटीएफ में निवेश कर सकते हैं। लेकिन उन्हें निवेश करते समय ईटीएफ के बाजार भाव और उसकी नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के बीच के अंतर पर बारीक नजर रखनी चाहिए क्योंकि क्योंकि ज्यादा प्रीमियम पर खरीदारी करने से रिटर्न प्रभावित हो सकता है।
सोने में हुआ अथाह निवेश?
बंदिशों का असर बड़े निवेशकों पर ज्यादा है मगर इनसे खुदरा निवेशकों के बीच सवाल उठने लगा है। वे जानना चाहते हैं कि फंड कंपनियों के समय कामकाजी चुनौतियों की वजह से बंदिश लगाई गई है या सोने में निवेश जरूरत से ज्यादा बढ़ जाना इसका कारण है।
धवन कहते हैं, ‘बाजार की स्थिति फिलहाल सामान्य और व्यवस्थित बनी हुई है तथा गोल्ड ईटीएफ के भाव सोने की देसी कीमतों के अनुरूप ही चल रहे हैं। फिलहाल निवेश के लिए सोने की मांग अपेक्षाकृत नरम है और गोल्ड ईटीएफ में आने वाले निवेश तथा उनकी नियमित परिचालन जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में फिजिकल सोना उपलब्ध है।’
उन्होंने कहा कि घरेलू सराफा बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी मौजूद है, जिससे फंड कंपनियां सबस्क्रिप्शन और रिडेम्प्शन से जुड़े लेनदेन को आराम से संभाल ले रही हैं।
खरीदें, बेचें या होल्ड करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इन प्रतिबंधों पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उसके बजाय उन्हें यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि निवेशकों के व्यवहार, परिसंपत्ति आवंटन और लंबी अवधि की निवेश रणनीति में सोने की भूमिका के बारे में इनसे क्या संकेत मिलता है।
वैल्यूमेट्रिक्स टेक्नॉलजीज के सह संस्थापक मनुज जैन का कहना है कि सोने को अल्पकालिक दांव के बजाय रणनीतिक परिसंपत्ति के रूप में देखना चाहिए। उनके हिसाब से सोना लंबी अवधि में निवेशकों की खरीदने की क्षमता बनाए रखने और महंगाई से सुरक्षा देने का काम करता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इक्विटी और अन्य परिसंपत्ति श्रेणियों के साथ पोर्टफोलियो में सोने को शामिल करने से विविधता बढ़ती है क्योंकि बाजार में गिरावट, आर्थिक अनिश्चितता या भू-राजनीतिक तनाव के दौर में इसका प्रदर्शन अक्सर शेयर बाजार से अलग रहता है।
जैन का कहना है कि निवेशकों को सोने का मूल्यांकन परिसंपत्ति आवंटन के अपने व्यापक ढांचे के भीतर ही करना चाहिए। निगम का कहना है कि सोना निवेश से ज्यादा सुरक्षा कवच (इंश्योरेंस) की तरह है। इसलिए नए सबस्क्रिप्शन पर अस्थायी रोक के बीच निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
निगम की पहली सलाह है कि पोर्टफोलियो में सोने का आवंटन तय सीमा के भीतर हो तो गोल्ड ईटीएफ में मौजूदा निवेश को बनाए रखें। दूसरी, एक्सचेंज पर गोल्ड ईटीएफ को उसके एनएवी से 1.5 फीसदी से ज्यादा प्रीमियम पर खरीदने से बचें।
तीसरी, नए निवेश के लिए गोल्ड फंड ऑफ फंड या सेकंडरी मार्केट में मिल रहे सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड पर विचार कर सकते हैं। अंत में यदि पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 15 फीसदी से ज्यादा हो गई है, तो पोर्टफोलियो को नए सिरे से संतुलित करें।

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