बिहार की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास ’10 सर्कुलर रोड’ एक बार फिर से सियासी और कानूनी विवादों के केंद्र में आ गया है। बिहार सरकार द्वारा इस हाई-प्रोफाइल बंगले को खाली करने के आदेश के बाद, राबड़ी देवी ने बंगला छोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने राज्य के भवन निर्माण विभाग को एक पत्र लिखकर गुजारिश की है कि उनसे यह सरकारी आवास खाली न कराया जाए और इसे साल 2030 तक उनके पास ही यथावत रहने दिया जाए।
भवन निर्माण विभाग को लिखे अपने पत्र में राबड़ी देवी ने राजनीति से इतर मानवीय और स्वास्थ्य कारणों को आगे रखा है। उन्होंने अपने पति और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की गंभीर सेहत का हवाला दिया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि लालू प्रसाद यादव का सिंगापुर में बड़ा किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद से वे लगातार स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं और संक्रमण (इंफेक्शन) के खतरे से जूझ रहे हैं। हाल ही में वे अपनी बेटी रोहिणी आचार्य के पास सिंगापुर में इलाज कराकर लौटे हैं और डॉक्टरों ने उन्हें बेहद नियंत्रित वातावरण में रहने की सलाह दी है।
“नीतीश कुमार के कहने पर ही बना था स्पेशल मेडिकल रूम”
राबड़ी देवी ने पत्र में एक बड़ा खुलासा करते हुए लिखा है कि डॉक्टरों की सख्त हिदायत है कि लालू यादव सीढ़ियां नहीं चढ़ सकते। इसी वजह से ’10 सर्कुलर रोड’ आवास के ग्राउंड फ्लोर (भूतल) पर लालू यादव के स्वास्थ्य की देखरेख के लिए एक विशेष मेडिकल रूम (स्पेशल कमरा) तैयार किया गया था। उन्होंने पत्र में लिखा कि लालू जी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह स्पेशल कमरा स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर ही सरकारी खर्च पर बनवाया गया था। वर्तमान आवास लालू प्रसाद यादव के इलाज, सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिहाज से पूरी तरह उपयुक्त है। नए स्थान पर शिफ्ट होने से उन्हें इंफेक्शन होने का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जो उनके जीवन के लिए नुकसानदेह साबित होगा।”
गौरतलब है कि बिहार सरकार और पटना जिला प्रशासन ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को इस सरकारी बंगले को खाली करने के लिए 15 जून 2026 तक का अंतिम समय दिया था। यह समय सीमा कल ही समाप्त हो चुकी है। हालांकि, राबड़ी देवी द्वारा भावुक और स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए लिखे गए इस पत्र के बाद, फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई जबरन या सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।

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