खान आशु, भोपाल
देश की सबसे पुरानी पार्टी कहलाने का गौरव रखते हैं… लेकिन व्यवहारिक अनुभव के नाम पर जीरो…! या कहें कि बेफिक्री के साथ बेशर्मी ओढ़ बैठे हैं…! इनती गिनती के उंगली पर गिने जाने वाले राज्यों की सत्ता लिए बैठे हैं…! हर चुनाव शिकस्त का मन बना रखा है…! इसीलिए तो किसी के संसदीय क्षेत्र का फार्म गलत हो जाता और कोई कैंडिडेट ही बीच चुनाव भाग खड़ा होता है…! बेहद शर्मनाक सीन तब राज्यसभा जैसी उपकार की सीट भी जीत लाने की हिम्मत नहीं होती…! आपाजान कानूनी मामलों को भी इसलिए छुपा जाती हैं कि उनमें उन्हें कोई सजा थोड़ी न हुई थी…! पार्टी की महानता यह कि उसने एक इकलौता कैंडिडेट ही मैदान में रखा…! पार्टी प्रमुख ने जो नाम तय किया था…! पार्षद चुनाव जैसे छोटे पद के लिए भी एक अतिरिक्त विकल्प रखकर चलने वाली सियासत के बीच एक भी डमी कैंडिडेट नहीं रखा गया…!
धार्मिक, पर्यटन और खुलकर दस दिन जीने की मंशा में घरों से निकल पड़े विधायक अब कागला विलाप कर रहे हैं…! होना कुछ नहीं है, अब चिड़िया खेत चुग चुकी है…!
आज के हालात पर किसी मित्र ने कहा है कि कांग्रेस की हालत ऐसी हो गई है, जैसे भंडारा खाने गए और खाना खत्म हो गया, बाहर निकले तो पता चला कि चप्पल चोरी चली गई…!
पुछल्ला
मियां बड़बोले…
तोड़फोड़, जोड़तोड़ और उठापठक के वह माहिर हैं। दूसरे दल की जीती हुई सरकार भी झपट लाने के माहिर। बड़बोलेपन से हाशिये पर बैठा दिए गए हैं। आज के एपिसोड में भी सस्पेंस चीरते हुए कह बैठे थे, कहीं दूर गांव जाने की जरूरत नहीं है, सबकुछ हमारे मन मुताबिक ही होगा।

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