September 2, 2026

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मप्र में बन सकते हैं नेपाल जैसे हालात, बरसों से छील रहे जमीन

  • खनन विभाग समेत जिम्मेदार बैठे खामोश
  • न नजर आ रहा, न हो रही निगरानी
  • मान बांध के नीचे बसे गांवों की सुरक्षा पर उठे सवाल

खान अशु, भोपाल। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में हाल ही में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि बड़े जलाशयों, बांधों और उनके नीचे बसे गांवों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है। अचानक आई बाढ़ में पानी, पत्थर और मलबे की तेज धारा ने गांवों, पुलों और सड़कों को तबाह कर दिया। इस घटना के बाद धार जिले के जीराबाद स्थित मान बांध और उसके आसपास की गतिविधियों को लेकर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मान बांध मान नदी पर बना महत्वपूर्ण सिंचाई प्रोजेक्ट है। इसके नीचे और आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र बसे हैं। ऐसे में बांध की सुरक्षा केवल जल संसाधन विभाग का विषय नहीं, बल्कि बांध के नीचे रहने वाले ग्रामीणों की जीवन सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

बांध के आसपास चूना खदानें और ब्लास्टिंग
जीराबाद क्षेत्र में सतगुरु सीमेंट की चूना-पत्थर खदानों के सरकारी पर्यावरण रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। एक खदान का क्षेत्रफल 21.080 हेक्टेयर है और इसमें अधिकतम 1,93,150 टन प्रतिवर्ष चूना-पत्थर निकालने का प्रस्ताव दर्ज है। सरकारी दस्तावेज में खनन की पद्धति में ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, रॉक ब्रेकर और जैक हैमर का स्पष्ट उल्लेख है। जीराबाद में एक अन्य 4.999 हेक्टेयर की सतगुरु सीमेंट खदान के दस्तावेज में भी ओपनकास्ट मैकेनाइज्ड माइनिंग के साथ ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग का उल्लेख है।

यही वजह है कि अब सवाल यह है कि मान बांध से इन खदानों की वास्तविक दूरी कितनी है और खदानों में होने वाले विस्फोटों से पैदा होने वाले कंपन का बांध की संरचना पर कोई प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है?

नुकसान हुआ है या नहीं, यह जांच से ही स्पष्ट होगा
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि खदानों की ब्लास्टिंग से मान बांध को नुकसान हुआ है। लेकिन बांध जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्ति के आसपास नियमित ब्लास्टिंग हो रही हो तो उसकी वैज्ञानिक निगरानी और सुरक्षा ऑडिट जरूरी है।

ब्लास्टिंग के दौरान पैदा होने वाले कंपन को Peak Particle Velocity (PPV) के माध्यम से मापा जा सकता है। इसके लिए बांध और खदान के बीच उपयुक्त स्थानों पर वाइब्रेशन मॉनिटर लगाए जा सकते हैं। प्रत्येक ब्लास्ट की तारीख, समय, विस्फोटक की मात्रा, दूरी और रिकॉर्ड किए गए कंपन का डेटा सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

नेपाल की घटना से प्रशासन को लेना चाहिए सबक
नेपाल में हुई हालिया आपदा में अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे की ओर आया और रास्ते में बसे इलाकों को तबाह कर दिया। विशेषज्ञों ने इसे ग्लेशियर/बर्फ-पत्थर के ढहने से उत्पन्न फ्लैश फ्लड बताया है।
मान बांध की स्थिति नेपाल की घटना जैसी नहीं है और दोनों घटनाओं की सीधी तुलना करना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। लेकिन आपदा से पहले जोखिम की पहचान और नीचे बसे लोगों को समय रहते चेतावनी देना दोनों मामलों में महत्वपूर्ण सबक है।

यदि किसी कारण से बांध की संरचना कमजोर होती है या अत्यधिक वर्षा के दौरान जलाशय में अचानक दबाव बढ़ता है, तो नीचे बसे गांवों तक पानी पहुंचने में बहुत कम समय लग सकता है।

बांध के नीचे बसे गांवों के लिए बने आपात योजना
प्रशासन को मान बांध के लिए एक स्पष्ट Downstream Emergency Action Plan तैयार करना चाहिए। इसमें बांध से नीचे आने वाले सभी गांवों की सूची, आबादी, सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थान, वैकल्पिक रास्ते और आपातकालीन संपर्क नंबर सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

साथ ही

  • बांध की नियमित Structural Safety Audit हो।
  • स्पिलवे, गेट, बांध की दीवार और नींव की जांच हो।
  • बांध के आसपास के क्षेत्र का भू-तकनीकी सर्वे कराया जाए।
  • खदानों में होने वाली प्रत्येक ब्लास्टिंग की निगरानी हो।
  • बांध के पास वाइब्रेशन/PPV मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए।
  • अत्यधिक वर्षा की स्थिति में जलस्तर की निगरानी बढ़ाई जाए।
  • बांध के नीचे बसे गांवों में सायरन और मोबाइल अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाए।
  • साल में कम से कम एक बार ग्रामीणों के साथ मॉक ड्रिल कराई जाए।

ग्रामीणों का सवाल : आपदा का इंतजार क्यों?
मान बांध और चूना खदानें दोनों क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। यदि खदानों में वैध और स्वीकृत ब्लास्टिंग हो रही है तो उसका मतलब यह नहीं कि बांध की सुरक्षा को लेकर सवाल नहीं उठाए जा सकते। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन मान बांध और आसपास की सभी चूना खदानों का संयुक्त तकनीकी सुरक्षा सर्वे कराए और रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

नेपाल की घटना ने दिखा दिया है कि प्रकृति का संकट कब और किस रूप में सामने आएगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। इसलिए मान बांध के नीचे बसे गांवों की सुरक्षा के लिए जांच और आपदा तैयारी आज से शुरू करना ही बेहतर है, किसी दुर्घटना के बाद नहीं।

तैयारी यह भी… सूत्रों का कहना है कि धार जिले की मनावर तहसील में सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए सोना मौजूद है। इसी वजह से यहाँ धार सीमेंट, महिंद्रा सीमेंट, सतगुरु सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे प्लांट धड़ल्ले से धरती का सीना चीर रहे हैं। सूत्रों का कहना यह भी है कि निकट भविष्य में यहां अंबुजा और किंग सीमेंट फैक्ट्रियों को भी आकार मिलने वाला है। बताया जाता है कि जल्दी ही इनका निर्माण कार्य शुरू हो सकता है।

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