भारत में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी अब सिर्फ एक अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है. पिछले कुछ वर्षों में डीमैट अकाउंट की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है और अब बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दस वर्षों में भारत में 40 करोड़ डीमैट अकाउंट होना पूरी तरह संभव है. यह अनुमान सिर्फ निवेशकों की संख्या बढ़ने का नहीं, बल्कि देश में निवेश की संस्कृति के तेजी से बदलने का संकेत भी देता है.अगर भारत में डीमैट अकाउंट की संख्या इसी दर से बढ़ती रही तो भारत में निवेश की क्रांति की शुरुआत हो सकती है.
Nippon India Mutual Fund के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO संदीप नायक का कहना है कि भारत में रिटेल निवेश का यह उछाल स्ट्रक्चरल है, यानी यह केवल कुछ वर्षों का ट्रेंड नहीं बल्कि लंबे समय तक जारी रहने वाला बदलाव है. उनका मानना है कि देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, युवाओं की बढ़ती आय, वित्तीय बचत का इक्विटी की ओर रुख और डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहुंच को देखते हुए अगले 10 वर्षों में भारत में 40 करोड़ डीमैट अकाउंट होना संभव है. उनका यह भी कहना है कि भारत अभी अपनी निवेश यात्रा के शुरुआती चरण में है और आगे रिटेल निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ सकती है. संदीप नायक का मानना है कि डीमैट खातों की संख्या वर्तमान में लगभग 20 करोड़ से बढ़कर अगले पांच वर्षों में 30 करोड़ हो सकती है और एक दशक में संभावित रूप से 40 करोड़ तक पहुंच सकती है.
क्यों तेजी से बढ़ रहे हैं डीमैट अकाउंट?
पिछले सात वर्षों में भारत में निवेश का तरीका पूरी तरह बदल गया है. पहले शेयर बाजार तक पहुंच सीमित थी, लेकिन अब स्मार्टफोन, सस्ते इंटरनेट, ऑनलाइन KYC और डिस्काउंट ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म ने निवेश को बेहद आसान बना दिया है. कुछ मिनटों में कोई भी व्यक्ति घर बैठे डीमैट अकाउंट खोलकर निवेश शुरू कर सकता है. इस सुविधा और आसानी ने आम आदमी को निवेशक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है.
इसके साथ ही सोशल मीडिया, यूट्यूब, फाइनेंशियल एजुकेशन और निवेश से जुड़े डिजिटल कंटेंट ने युवाओं के बीच शेयर बाजार के प्रति रुचि बढ़ाई है. कोरोना महामारी के बाद लोगों ने बचत और निवेश के महत्व को अधिक गंभीरता से समझा. यही वजह है कि म्यूचुअल फंड SIP, इक्विटी निवेश और ETF जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हुए हैं. संदीप नायक का मानना है कि यह बदलाव अस्थायी नहीं है और आने वाले वर्षों में भी इसकी रफ्तार बनी रह सकती है.
युवाओं की बढ़ती भागीदारी से क्या बदल सकता है?
भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है. आज की युवा पीढ़ी पारंपरिक निवेश विकल्पों के साथ-साथ शेयर बाजार को भी संपत्ति बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम मान रही है. नौकरी शुरू करने के साथ ही बड़ी संख्या में युवा SIP और इक्विटी निवेश की शुरुआत कर रहे हैं.
यदि यही रुझान जारी रहता है तो आने वाले वर्षों में भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी और मजबूत होगी. इससे बाजार में लगातार नई पूंजी आएगी, कंपनियों को विस्तार के लिए आसानी से फंड मिलेगा और IPO बाजार को भी मजबूती मिलेगी. घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी विदेशी निवेशकों पर निर्भरता को भी कुछ हद तक कम कर सकती है.
अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा फायदा?
डीमैट अकाउंट की संख्या बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि देश की बचत धीरे-धीरे प्रोडक्टिव एसेट्स की ओर जाएगी. जब लोग शेयर बाजार के माध्यम से कंपनियों में निवेश करते हैं, तो कंपनियों के पास नए प्रोजेक्ट शुरू करने, उत्पादन बढ़ाने और रोजगार सृजित करने के लिए पूंजी उपलब्ध होती है. इससे आर्थिक विकास को गति मिलती है.
इसके अलावा मजबूत घरेलू निवेशक आधार बाजार को भी स्थिरता प्रदान करता है. पिछले कुछ वर्षों में कई बार देखा गया कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों ने खरीदारी करके बाजार को संभाला. यदि डीमैट अकाउंट की संख्या लगातार बढ़ती रही तो भविष्य में यह ताकत और मजबूत हो सकती है.
क्या सिर्फ डीमैट अकाउंट बढ़ना ही काफी है?
डीमैट अकाउंट खोलना आसान है, लेकिन सफल निवेशक बनना उतना आसान नहीं। बड़ी संख्या में नए निवेशक बिना पर्याप्त जानकारी के सोशल मीडिया, व्हाट्सएप टिप्स या किसी शेयर में तेजी देखकर निवेश कर देते हैं. ऐसी स्थिति में बाजार में उतार-चढ़ाव आने पर उन्हें भारी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
यही कारण है कि संदीप नायक निवेशकों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ वित्तीय साक्षरता पर भी जोर देते हैं। उनका मानना है कि निवेशकों को केवल अकाउंट खोलने के लिए नहीं, बल्कि सही तरीके से निवेश करना भी सीखना होगा. यदि निवेशक जोखिम, वैल्यूएशन, एसेट एलोकेशन और लंबी अवधि की रणनीति को समझेंगे, तभी वे शेयर बाजार से बेहतर रिटर्न हासिल कर पाएंगे.
भारत में डीमैट अकाउंट की संख्या तेजी से बढ़ना निश्चित रूप से देश के वित्तीय बाजारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है. इससे अधिक लोग निवेश की मुख्यधारा से जुड़ेंगे, कंपनियों को पूंजी जुटाने में आसानी होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. यदि 40 करोड़ डीमैट अकाउंट का लक्ष्य हासिल होता है तो भारत दुनिया के सबसे बड़े रिटेल निवेशक बाजारों में शामिल हो सकता है.

Related Posts
लगातार गिरावट की ओर सोना : फरवरी के अंत से अब तक 25 प्रतिशत तक टूटा
शेयर बाजार में होगा 2.3 अरब डॉलर निवेश! Adani Green, Groww समेत 12 शेयर MSCI इंडेक्स में हो सकते हैं शामिल
‘द वेल्थ’ ने लॉन्च किया नया फंड, 29 जुलाई तक निवेश का मौका